‘तुम्हारा नाम आतंकी गिरोह से जुड़ा है’, कॉल आते ही ट्रांसपोर्टर ने दिखाया साहस

Fake ATS Officer बनकर Digital Arrest की कोशिश

Digital Arrest के नाम पर होने वाली साइबर ठगी लगातार नए रूप ले रही है। पहले बैंक खाते, मनी लॉन्ड्रिंग और पार्सल में प्रतिबंधित सामान मिलने जैसी कहानियां गढ़ने वाले साइबर अपराधी अब लोगों को आतंकवादी संगठनों से संबंध होने का डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा ही मामला सोमवार को मैहर में सामने आया, जहां एक ट्रांसपोर्टर की समझदारी ने बड़ी साइबर ठगी को होने से रोक दिया।

बांधवगढ़ जाते समय आया संदिग्ध कॉल

सतना के टिकुरिया टोला निवासी 59 वर्षीय ट्रांसपोर्टर संतोष कुमार साहू कार से बांधवगढ़ जा रहे थे। रास्ते में मैहर के पास उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई ATS का अधिकारी बताया और कहा कि जांच के दौरान उनका नाम एक आतंकवादी संगठन से जुड़ा मिला है। इसके बाद कॉलर ने गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हुए लगातार बातचीत जारी रखी, ताकि सामने वाला घबराकर उसके निर्देशों का पालन करने लगे।

बातचीत के दौरान बढ़ा संदेह

कुछ देर बाद कथित अधिकारी ने संतोष साहू से दूसरे मोबाइल नंबर पर संपर्क करने को कहा। साथ ही भरोसा दिलाया कि यदि वे जांच में सहयोग करेंगे तो मामला बिना किसी कार्रवाई के यहीं खत्म कर दिया जाएगा। यहीं से ट्रांसपोर्टर को पूरी कहानी पर संदेह हुआ। उन्हें एहसास हो गया कि यह किसी सरकारी एजेंसी की कार्रवाई नहीं, बल्कि साइबर ठगी का प्रयास हो सकता है।

सीधे थाने पहुंचे, ठगों की योजना हुई फेल

घबराने के बजाय संतोष साहू ने फोन काटने की बजाय बातचीत जारी रखी और अपनी कार सीधे मैहर कोतवाली पहुंचा दी। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को पूरी जानकारी दी गई। पुलिस ने तत्काल साइबर सेल को सूचना देकर कॉल करने वाले नंबर की जांच शुरू कराई। जैसे ही ठगों को पुलिस की सक्रियता का अंदाजा हुआ, उन्होंने कॉल बंद कर दिया। शुरुआती जांच में यह भी स्पष्ट हो गया कि जिस नंबर से कॉल किया गया था, उसका मुंबई ATS या किसी पुलिस विभाग से कोई संबंध नहीं था।

बदल रहा है साइबर ठगी का तरीका

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी लोगों को डराने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। कभी CBI, ED या पुलिस अधिकारी बनकर तो कभी ATS के नाम पर लोगों को Digital Arrest का भय दिखाया जाता है। उनका उद्देश्य लोगों को मानसिक रूप से इतना डरा देना होता है कि वे बिना जांच-पड़ताल के पैसे ट्रांसफर कर दें।

पुलिस की सलाह

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति फोन पर खुद को किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी, डिजिटल अरेस्ट या आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दे, तो घबराएं नहीं। ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की रकम ट्रांसफर न करें और तुरंत स्थानीय पुलिस, साइबर सेल या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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