अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी की जांच अब वाराणसी तक पहुंच गई है। पुलिस और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मंदिर में नकदी गिनने और जमा कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया से हुई और उनके सत्यापन में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई। इसी क्रम में वाराणसी की एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी जांच के दायरे में आई है।
छह कर्मचारियों की भर्ती कैसे हुई
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मंदिर में नकदी गिनने का काम कर रहे छह कर्मचारियों की नियुक्ति एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी के माध्यम से हुई थी। एजेंसी ने इन कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराया था। अब पुलिस एजेंसी से भर्ती प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन, पुलिस वेरिफिकेशन और नियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी जुटा रही है।
जांच एजेंसियां किन सवालों के जवाब तलाश रही हैं
जांच का फोकस केवल चोरी तक सीमित नहीं है। अधिकारी यह भी जानना चाहते हैं कि—
- कर्मचारियों का चयन किस आधार पर किया गया?
- क्या सभी का पुलिस सत्यापन कराया गया था?
- एजेंसी और मंदिर प्रशासन के बीच अनुबंध की शर्तें क्या थीं?
- क्या भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई?
- क्या चोरी की घटना किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी?
इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।
अब तक क्या कार्रवाई हुई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें छह कर्मचारी नकदी गिनने के कार्य से जुड़े थे, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच चल रही है। अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
सीसीटीवी फुटेज बना अहम सबूत
जांच अधिकारियों के मुताबिक, मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य बनी है। फुटेज के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की गई और उसके बाद कई लोगों से पूछताछ की गई। पुलिस अब डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड का भी मिलान कर रही है।
बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। दान राशि के बैंक में जमा होने की पूरी प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है। इसी वजह से बैंक अधिकारियों और इस प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं संस्थागत स्तर पर कोई चूक या मिलीभगत तो नहीं हुई।
आगे क्या
जांच एजेंसियां अब वाराणसी स्थित संबंधित सिक्योरिटी एजेंसी के दस्तावेज, कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड और भर्ती प्रक्रिया की बारीकी से जांच कर रही हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो एजेंसी के जिम्मेदार लोगों से भी पूछताछ या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस आधिकारिक तौर पर पूरे मामले का खुलासा होने का इंतजार करने की बात कह रही है।