नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान संबंधों पर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है। पूर्व रॉ प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत ने पाकिस्तान के साथ संवाद बहाल करने का समर्थन करते हुए कहा कि महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला जिस तरह बातचीत की पैरवी कर रहे हैं, वह उनकी अपनी सोच से भी मेल खाती है। उनका कहना है कि किसी भी दुश्मन देश के साथ भी अंततः बातचीत और कूटनीति ही समाधान का रास्ता होती है।
100 से अधिक हस्तियों ने भी की थी वार्ता की अपील
दुलत का बयान ऐसे समय आया है जब भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को संयुक्त पत्र लिखकर द्विपक्षीय वार्ता फिर शुरू करने की अपील की है। इस पत्र पर फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती समेत कई प्रमुख हस्ताक्षर हैं।
‘आतंकवाद पर भी हो सीधी बातचीत’
पूर्व रॉ प्रमुख ने कहा कि भारत का यह रुख सही रहा है कि आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते, लेकिन उनका मानना है कि यदि आतंकवाद ही सबसे बड़ी समस्या है तो उसी मुद्दे पर पाकिस्तान से सीधे बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बातचीत से बचना कोई बेहतर कूटनीतिक विकल्प नहीं है।
भाजपा ने किया विरोध
भारत-पाक वार्ता की मांग को लेकर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेताओं ने कहा कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद जारी रहेगा, तब तक बातचीत संभव नहीं है। भाजपा ने अपनी पुरानी नीति दोहराते हुए कहा कि “टेरर और टॉक्स साथ-साथ नहीं चल सकते।”
पहले भी संवाद के पक्षधर रहे हैं दुलत
अमरजीत सिंह दुलत पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद और बैक-चैनल कूटनीति की वकालत कर चुके हैं। उनका मानना रहा है कि लंबे समय तक बातचीत बंद रहने से समाधान और कठिन हो जाता है।