भोपाल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने वर्ष 2016 में दर्ज दुर्लभ वन्यजीव सैंड बोआ की तस्करी के मामले में अमन वामने और वरुण विश्वकर्मा को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों आरोपियों को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 5-5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले के अनुसार 22 अगस्त 2016 को स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) और भोपाल क्राइम ब्रांच ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए राहुल नगर क्षेत्र के पास दो संदिग्धों को पकड़ा था। तलाशी के दौरान उनके पास से कपड़े की थैली में एक जीवित सैंड बोआ बरामद हुआ था। इसके बाद दोनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।
क्यों खास है सैंड बोआ?
सैंड बोआ, जिसे रेड सैंड बोआ भी कहा जाता है, भारत में संरक्षित वन्यजीवों में शामिल है। अंधविश्वास और अवैध अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कारण इसकी तस्करी के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रजाति की खरीद-फरोख्त और शिकार कानूनन प्रतिबंधित है।
वन्यजीव तस्करी पर लगातार कार्रवाई
मध्य प्रदेश में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग लगातार वन्यजीव तस्करी के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। हाल के वर्षों में सैंड बोआ सहित कई संरक्षित प्रजातियों की तस्करी से जुड़े मामलों में आरोपियों को अदालतों से सजा भी मिली है, जिससे वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।