सतना। रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने मैहर मुख्यालय में आयोजित विभिन्न विभागों की प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान एक अलग पहल की। बैठक के बीच कई अधिकारी-कर्मचारियों के बार-बार वॉशरूम जाने पर उन्होंने कारण पूछा और कहा, “बार-बार क्यों जा रहे हैं, शुगर पेशेंट हैं क्या?” इसके बाद उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला को बैठक में मौजूद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्लड शुगर टेस्ट कराने के निर्देश दिए।
बैठक कक्ष के बाहर लगाया गया जांच शिविर
कमिश्नर के निर्देश मिलते ही सिविल अस्पताल मैहर की पैरामेडिकल टीम मौके पर पहुंची। बैठक कक्ष के बाहर ही ग्लूकोमीटर की मदद से विशेष जांच शिविर लगाया गया, जहां कुल 49 अधिकारियों और कर्मचारियों की ब्लड शुगर जांच की गई।
3 अफसरों का पहला डायग्नोस
जांच रिपोर्ट में 16 अधिकारियों-कर्मचारियों का ब्लड शुगर स्तर 200 एमजी/डीएल से अधिक पाया गया। इनमें 3 अधिकारियों को पहली बार पता चला कि उन्हें मधुमेह है, जबकि 13 लोग पहले से डायबिटीज के मरीज थे और नियमित दवा ले रहे थे। शेष 33 लोगों की रिपोर्ट सामान्य या नियंत्रित मिली।
समय पर जांच से हो सकती है बीमारी की पहचान
बैठक के दौरान कमिश्नर ने कहा कि बार-बार पेशाब आना मधुमेह का एक सामान्य लक्षण हो सकता है, इसलिए समय पर जांच कराना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने भी मौके पर जांच की व्यवस्था कर अधिकारियों-कर्मचारियों की स्क्रीनिंग पूरी की।
मधुमेह के प्रमुख लक्षण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मधुमेह के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं—
- बार-बार पेशाब आना
- अत्यधिक प्यास लगना
- बिना कारण वजन कम होना
- लगातार थकान महसूस होना
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, नियमित दवा और संतुलित जीवनशैली अपनाकर मधुमेह को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है।