अगर आपने भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) लगवाने के लिए गूगल पर वेबसाइट खोजी है, तो सावधान हो जाइए। साइबर ठग अब AI की मदद से ऐसे पोर्टल तैयार कर रहे हैं, जो हूबहू सरकारी वेबसाइट जैसे दिखते हैं। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का खुलासा किया है…
बिजनौर। वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगवाने की प्रक्रिया का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने नया तरीका अपनाया है। बिजनौर पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जिसने कथित तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से सरकारी वेबसाइट जैसी दिखने वाला पोर्टल तैयार किया। लोग इसे असली सरकारी वेबसाइट समझकर नंबर प्लेट बुक करते थे और भुगतान सीधे ठगों के खातों में पहुंच जाता था। मामले की जांच जारी है।
कैसे चलता था पूरा खेल
जांच के अनुसार, आरोपी इंटरनेट पर ऐसी वेबसाइट तैयार करते थे, जिसका डिजाइन और लेआउट सरकारी पोर्टल से काफी मिलता-जुलता था। HSRP बुकिंग के नाम पर लोगों से वाहन का विवरण और मोबाइल नंबर भरवाया जाता, फिर ऑनलाइन भुगतान कराया जाता। भुगतान होने के बाद या तो कोई सेवा नहीं मिलती थी या फिर संपर्क पूरी तरह टूट जाता था।
AI ने साइबर ठगों का काम आसान किया
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि AI टूल्स की मदद से अब नकली वेबसाइट, सरकारी नोटिस और फर्जी इंटरफेस पहले की तुलना में कहीं अधिक वास्तविक दिखने लगे हैं। यही वजह है कि आम लोग असली और नकली पोर्टल के बीच अंतर नहीं कर पाते और ठगी का शिकार हो जाते हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
HSRP के नाम पर फर्जी वेबसाइटों से ठगी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी विभिन्न राज्यों में साइबर अपराधी नकली बुकिंग पोर्टल बनाकर लोगों से पैसे ऐंठ चुके हैं। साइबर सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर लोगों को केवल अधिकृत वेबसाइटों से ही HSRP बुक करने की सलाह देती रही हैं।
ऐसे पहचानें फर्जी वेबसाइट
- वेबसाइट का URL ध्यान से जांचें।
- केवल राज्य सरकार या अधिकृत HSRP सेवा प्रदाता के पोर्टल का ही उपयोग करें।
- सोशल मीडिया या मैसेज में मिले अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें।
- भुगतान से पहले वेबसाइट की प्रामाणिकता अवश्य जांच लें।
- किसी भी संदिग्ध वेबसाइट की सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दें।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि HSRP या किसी भी सरकारी सेवा के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का ही इस्तेमाल करें। यदि किसी वेबसाइट पर संदेह हो तो भुगतान करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। साइबर अपराध के मामलों में थोड़ी सी सावधानी बड़ी आर्थिक हानि से बचा सकती है।