मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के अपहरण और हत्या मामले में उम्रकैद की सजा पाए पंजाब पुलिस के पूर्व DSP जसपाल सिंह का वर्तमान ठिकाना जांच एजेंसियों के लिए सवाल बन गया है। नाभा ओपन जेल प्रशासन द्वारा कराए गए पता सत्यापन के दौरान वह अपने रिकॉर्ड में दर्ज पते पर नहीं मिले। इसके बाद पंजाब पुलिस से उनके वर्तमान पते की पुष्टि करने को कहा गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद चल रहा है। फिल्म के कारण एक बार फिर खालड़ा हत्याकांड राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।
गांव में नहीं मिला कोई रिकॉर्ड
जांच के दौरान पुलिस टीम होशियारपुर जिले के उस पते पर पहुंची, जो अदालत के रिकॉर्ड और जेल दस्तावेजों में दर्ज बताया गया था। स्थानीय स्तर पर पूछताछ में अधिकारियों को ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि जसपाल सिंह वहां रहते थे। गांव के सरपंच के बयान के आधार पर रिपोर्ट नाभा जेल प्रशासन को भेज दी गई है। हालांकि अभी तक किसी भी सरकारी एजेंसी ने जसपाल सिंह को फरार घोषित नहीं किया है। फिलहाल मामला उनके पते के सत्यापन और वर्तमान ठिकाने की पुष्टि तक सीमित है।
2023 में मिली थी अंतरिम जमानत
पूर्व DSP जसपाल सिंह को वर्ष 2023 में अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। जेल अधिकारियों की ओर से अब उनके पते का सत्यापन कराया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के दौरान यह मामला सामने आया और इसके बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मामले को लेकर पंजाब में विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि दोषियों की समयपूर्व रिहाई से जुड़ी प्रक्रिया केंद्र सरकार और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार होती है तथा मामले को लेकर कई दावे राजनीतिक हैं।
क्या था जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा ने 1990 के दशक में पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को उजागर किया था। वर्ष 1995 में उनका अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। बाद में CBI जांच के आधार पर पंजाब पुलिस के कई अधिकारियों को दोषी ठहराया गया और पूर्व DSP जसपाल सिंह समेत कई आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।