दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। लंबे समय से यह माना जा रहा था कि पार्टी पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को मैदान में उतारेगी, लेकिन अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने के फैसले ने स्थानीय संगठन में असंतोष पैदा कर दिया। उम्मीदवार की घोषणा के कुछ ही समय बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थक बड़ी संख्या में दतिया की सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य हाईवे पर जाम लगाया, टायर जलाए और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी की। कई स्थानों पर बाजार भी प्रभावित रहे।
जिलाध्यक्ष समेत पूरी जिला कार्यकारिणी ने दिया इस्तीफा
सबसे बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब भाजपा के जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने जिला कार्यकारिणी, मंडल अध्यक्षों, मोर्चा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में बूथ अध्यक्षों के साथ सामूहिक इस्तीफे की घोषणा कर दी। इस्तीफे में कहा गया कि यदि 24 घंटे के भीतर पार्टी डॉ. नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार नहीं बनाती है, तो प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देने पर विचार किया जाएगा।
आखिर क्यों कटा नरोत्तम मिश्रा का टिकट
भाजपा के इस फैसले के पीछे कई राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। डॉ. नरोत्तम मिश्रा वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती से करीब 7 हजार वोटों से हार गए थे। इसके बाद इस सीट पर पार्टी लगातार संगठनात्मक और चुनावी फीडबैक ले रही थी। माना जा रहा है कि इसी फीडबैक और आंतरिक सर्वे के आधार पर भाजपा नेतृत्व ने इस बार नया चेहरा उतारने का फैसला किया।
आशुतोष तिवारी कौन हैं
भाजपा ने दतिया उपचुनाव में आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया है। वे लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहे हैं और पूर्व संभागीय संगठन मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। पार्टी नेतृत्व उन्हें संगठन का मजबूत चेहरा मानता है, हालांकि स्थानीय स्तर पर कई कार्यकर्ता उनके नाम से सहमत नहीं दिख रहे हैं।
उपचुनाव क्यों हो रहा है
दतिया सीट पर उपचुनाव इसलिए कराया जा रहा है क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता उनके खिलाफ बैंक धोखाधड़ी मामले में सजा के बाद समाप्त हो गई थी। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की और प्रमुख दलों ने उम्मीदवार घोषित किए।
भाजपा के सामने बढ़ी चुनौती
दतिया भाजपा का पारंपरिक गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन 2023 में मिली हार के बाद पार्टी इस सीट को दोबारा जीतने की रणनीति बना रही थी। अब टिकट वितरण के बाद सामने आए संगठनात्मक विरोध ने चुनावी समीकरण को और जटिल बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व नाराज कार्यकर्ताओं को कैसे मनाता है और क्या अगले 24 घंटे में संगठन स्तर पर कोई बड़ा निर्णय लिया जाता है।