क्या मॉनसून ‘लापता’ हो गया है? सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता, IMD ने बताई असली वजह

देश के कई हिस्सों में लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन आसमान में मॉनसूनी बादल अचानक कम होते दिखाई दे रहे हैं। ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरों में भारत के करीब 70-80% हिस्से पर बादलों की गतिविधि बेहद कमजोर दिखी है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या मॉनसून कमजोर पड़ गया है? हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मॉनसून के “ब्रेक फेज” (Break Monsoon) का हिस्सा है, न कि मॉनसून के खत्म होने का संकेत।

सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा

11 जुलाई को जारी सैटेलाइट तस्वीरों में भारत के अधिकांश मध्य, पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में बादलों की मात्रा सामान्य से काफी कम दिखाई दी। केवल पूर्वोत्तर भारत, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और हिमालय से लगे कुछ क्षेत्रों में घने वर्षा वाले बादल सक्रिय रहे। यही वजह है कि इन इलाकों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

आखिर बारिश पर अचानक क्यों लगा ब्रेक

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण “ब्रेक मॉनसून” है। यह वह स्थिति होती है जब मॉनसून पूरी तरह समाप्त नहीं होता, लेकिन कुछ दिनों के लिए उसकी सक्रियता कमजोर पड़ जाती है।

इस दौरान:

  • मॉनसून ट्रफ (Monsoon Trough) अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक जाती है।
  • मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में बारिश कम हो जाती है।
  • पूर्वोत्तर और हिमालय से लगे राज्यों में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होती है।

मौसम विभाग ने क्या कहा

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपने विस्तारित पूर्वानुमान में कहा है कि अगले 6-7 दिनों तक देश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रह सकती है। वहीं 11 और 12 जुलाई को पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

इसका असर किसानों पर भी पड़ सकता है

बारिश की रफ्तार धीमी होने का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल सहित कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक बारिश कमजोर रहने की आशंका है, जिससे सोयाबीन, कपास और मक्का जैसी फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है।

क्या फिर लौटेगा मॉनसून

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। मॉनसून का कमजोर पड़ना हर साल किसी न किसी अवधि में देखा जाता है। जैसे ही अनुकूल मौसमी प्रणालियां और बंगाल की खाड़ी से नमी बढ़ेगी, बारिश की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं। यानी यह स्थायी बदलाव नहीं बल्कि मौसम के स्वाभाविक चक्र का हिस्सा है।

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