यरुशलम। इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव कराए जाएंगे। सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख ओफिर काट्ज़ ने संसदीय समिति में पुष्टि की कि चुनाव कानून के अनुसार तय तारीख पर ही होंगे। इससे पहले संसद भंग होने के बाद चुनाव समय से पहले होने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि मतदान 27 अक्टूबर को ही होगा।
38 साल बाद पूरा कार्यकाल करेगी संसद
इजरायल में सरकारों का पूरा चार वर्षीय कार्यकाल पूरा करना दुर्लभ माना जाता है। राजनीतिक अस्थिरता और गठबंधन टूटने के कारण पिछले कई दशकों में अधिकांश चुनाव समय से पहले हुए। 2026 का चुनाव लगभग 38 साल बाद ऐसा चुनाव होगा, जब संसद अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा कर रही है।
नेतन्याहू के सामने क्या है चुनौती
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 2022 में सत्ता में लौटे थे और उनकी मौजूदा सरकार को देश के इतिहास की सबसे दक्षिणपंथी सरकारों में गिना जाता है। हालांकि 7 अक्टूबर 2023 के हमले, उसके बाद गाजा, लेबनान और ईरान से जुड़े संघर्षों तथा घरेलू राजनीतिक विवादों के बाद उनकी सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है। कई हालिया जनमत सर्वेक्षणों में उनके गठबंधन को नुकसान होने के संकेत मिले हैं, हालांकि विपक्ष के पास भी स्पष्ट बहुमत का रास्ता आसान नहीं दिख रहा।
कौन बन सकता है सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी
इजरायल की राजनीति में पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़ेनकोट को नेतन्याहू के प्रमुख चुनौतीकर्ताओं में माना जा रहा है। उनकी नई मध्यमार्गी राजनीतिक पार्टी चुनावी सर्वेक्षणों में अच्छा प्रदर्शन करती दिख रही है। हालांकि इजरायल की गठबंधन आधारित राजनीति में केवल सबसे बड़ी पार्टी बनना सरकार बनाने की गारंटी नहीं होता। अंतिम तस्वीर चुनाव परिणाम और उसके बाद बनने वाले गठबंधनों पर निर्भर करेगी।
चुनाव क्यों होंगे अहम
यह 2023 के हमास हमले और उसके बाद शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्षों के बाद इजरायल का पहला आम चुनाव होगा। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, युद्ध की रणनीति, अर्थव्यवस्था और न्यायपालिका से जुड़े विवाद चुनाव के प्रमुख मुद्दे रहेंगे। चुनाव परिणाम न केवल इजरायल की घरेलू राजनीति बल्कि पश्चिम एशिया की कूटनीति पर भी असर डाल सकते हैं।