विंध्य के किसानों का वर्षों पुराना इंतजार अब खत्म होने की ओर बढ़ता दिख रहा है। बरगी परियोजना की सबसे कठिन कड़ी मानी जाने वाली 12 किलोमीटर लंबी सुरंग तैयार हो चुकी है और मुख्य नहर भी लगभग पूरी हो गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि आखिर नर्मदा का पानी खेतों तक कब पहुंचेगा।
5 साल की सबसे बड़ी चुनौती हुई पूरी
बरगी परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा करीब 12 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग थी। कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों और तकनीकी चुनौतियों के कारण इसे पूरा होने में लगभग 15 साल लगे। अब सुरंग तैयार होने के साथ परियोजना का सबसे बड़ा अवरोध समाप्त हो गया है। इसके बाद प्रशासन ने नहरों में जल प्रवाह शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। अनुकूल परिस्थितियां रहीं तो अगले एक से डेढ़ महीने में नर्मदा का पानी छोड़ा जा सकता है।
सांसद ने नहरों पर जाकर देखा कितना बाकी काम

बुधवार को सतना सांसद गणेश सिंह ने कटनी जिले के कैलवारा से झुकेही, उचेहरा, श्यामनगर और रहिकवारा तक बरगी नहर परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति, नहरों की स्थिति और किसानों तक पानी पहुंचाने में आ रही बाधाओं की समीक्षा की। सांसद ने अधिकारियों से कहा कि परियोजना का उद्देश्य तभी पूरा माना जाएगा, जब नर्मदा का पानी बिना किसी रुकावट के खेतों तक पहुंचे।
रास्ता लगभग साफ, लेकिन कुछ काम अभी बाकी
अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान बताया कि कैलवारा से रहिकवारा तक मुख्य नहर लगभग अवरोध मुक्त हो चुकी है। हालांकि झुकेही-बेरमा के बीच ग्रामीणों ने स्टील ब्रिज की मांग रखी है। रहिकवारा से झाली तक कुछ निर्माण कार्य, सिंहपुर क्षेत्र में भू-अर्जन, नागौद के पास राष्ट्रीय राजमार्ग क्रॉसिंग, भुलनी वितरिका और बेरमा-भैंसासुर के बीच लंबित मुआवजा वितरण के कारण कुछ हिस्सों का काम अभी बाकी है। टमस नदी पर बन रहा एक्वाडक्ट भी अंतिम चरण में है।
774 गांवों की बदलेगी तस्वीर
परियोजना पूरी होने के बाद सतना और मैहर जिले के 774 गांवों की करीब 1 लाख 35 हजार 573 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। उचेहरा से श्यामनगर के बीच बनी माइनर नहरों में भी जल्द पानी पहुंचाने की तैयारी है। इससे किसानों की सिंचाई पर निर्भरता कम होगी, फसलों का रकबा बढ़ेगा और पूरे विंध्य क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
अब सबकी नजर पहली धार पर
बरगी परियोजना का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब अंतिम तकनीकी परीक्षण, नहरों की सफाई और बची हुई बाधाओं को दूर करने का काम चल रहा है। किसानों की उम्मीद है कि वर्षों के इंतजार के बाद इस बार नर्मदा का पानी सचमुच उनके खेतों तक पहुंचेगा और विंध्य की प्यास बुझाने का सपना साकार होगा।