कौन हैं KHAN SIR: कितनी डिग्रियां, क्या पढ़ाते हैं और क्यों रहते हैं चर्चा में…

पटना। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच ‘खान सर’ एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिन्हें किसी परिचय की जरूरत नहीं है। अपने ठेठ देसी अंदाज, सरल भाषा और हास्य से भरपूर पढ़ाने की शैली के कारण उन्होंने लाखों छात्रों के बीच खास पहचान बनाई है। हालांकि लोकप्रियता के साथ-साथ वे कई बार विवादों को लेकर भी सुर्खियों में रहे हैं।

खान सर का वास्तविक नाम फैसल खान बताया जाता है। उनका संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से है, जबकि उन्होंने अपने शिक्षण करियर को बिहार की राजधानी पटना से नई ऊंचाई दी। वे ‘खान जीएस रिसर्च सेंटर’ के संस्थापक हैं और यूट्यूब के जरिए देशभर के छात्रों तक पहुंच बना चुके हैं।

कितनी पढ़ाई की है

उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, खान सर ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विज्ञान (B.Sc.) की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने भूगोल विषय में स्नातकोत्तर (Master’s in Geography) की पढ़ाई की। शिक्षा के दौरान उनकी रुचि प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य अध्ययन विषयों में रही।

क्या पढ़ाते हैं खान सर?

खान सर मुख्य रूप से जनरल स्टडीज (GS), करंट अफेयर्स, भूगोल, इतिहास, राजनीति विज्ञान, सामान्य विज्ञान और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विषय पढ़ाते हैं। उनके लेक्चर UPSC, BPSC, SSC, रेलवे, NDA, CDS और अन्य सरकारी नौकरी की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

क्यों हैं इतने लोकप्रिय?

खान सर की सबसे बड़ी ताकत उनकी सरल और बोलचाल की भाषा मानी जाती है। वे जटिल विषयों को रोजमर्रा के उदाहरणों के जरिए समझाते हैं, जिससे ग्रामीण और हिंदी माध्यम के छात्रों को भी कठिन विषय आसानी से समझ में आ जाते हैं। इसी शैली ने उनके यूट्यूब चैनल को देश के सबसे लोकप्रिय शैक्षणिक प्लेटफॉर्म्स में शामिल कर दिया है।

विवादों से भी रहा है नाता

लोकप्रियता के साथ खान सर कई बार विवादों में भी रहे हैं। सोशल मीडिया पर दिए गए कुछ बयानों, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े आंदोलनों और अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर उनकी टिप्पणियों को लेकर समय-समय पर बहस छिड़ती रही है। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि वे हमेशा छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं।

आज खान सर केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि डिजिटल शिक्षा जगत की एक बड़ी पहचान बन चुके हैं। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि सरल भाषा और विषय की गहरी समझ के दम पर लाखों छात्रों तक पहुंच बनाई जा सकती है।

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