केरल। देश में महिलाओं की सामाजिक और पारिवारिक स्थिति को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, एक राज्य में ऐसी महिलाओं की संख्या सबसे अधिक पाई गई है जो अपने पति के बिना रह रही हैं। इनमें विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता और पति से अलग रह रही महिलाएं शामिल हैं।
सर्वेक्षण के मुताबिक, इस श्रेणी में सबसे अधिक हिस्सेदारी केरल की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं। बड़ी संख्या में पुरुषों का विदेशों या दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए पलायन, महिलाओं की बेहतर जीवन प्रत्याशा और बदलती सामाजिक परिस्थितियां इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
जनसांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, केरल में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक है और राज्य में वृद्ध आबादी का प्रतिशत भी देश के कई अन्य राज्यों से ज्यादा है। यही वजह है कि यहां विधवा महिलाओं की संख्या भी अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलती है।
सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि पति से अलग रहने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या केवल पारिवारिक बदलाव का संकेत नहीं है, बल्कि यह आर्थिक स्वतंत्रता, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता में आए बदलावों को भी दर्शाती है। हालांकि इसके साथ ही ऐसी महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक सहायता की आवश्यकता भी बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में देश के कई राज्यों में इसी तरह के जनसांख्यिकीय बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसलिए सरकारों को महिलाओं के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत होगी।