सतना/मैहर। मैहर जिले में खसरे (मीजल्स) के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में हुई जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक में सामने आया कि विकासखंड के देवरी, रैगांव, सेमरा और अजवाइन क्षेत्र में खसरे के मामले मिले हैं। जांच के लिए भेजे गए 43 संदिग्ध मामलों में से 21 बच्चों में मीजल्स संक्रमण की पुष्टि हुई है। प्रभावित बच्चों में अधिकांश की उम्र पांच वर्ष से कम बताई गई है। जिला प्रशासन के अनुसार वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए निगरानी और टीकाकरण गतिविधियों को और तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
टीकाकरण में मिली खामियां
समीक्षा बैठक के दौरान पाया गया कि कुछ क्षेत्रों में नियमित टीकाकरण कार्य और संबंधित रिकॉर्ड अपडेट करने में गंभीर लापरवाही बरती गई। कई स्थानों पर निर्धारित गतिविधियां पूरी नहीं होने और ऑनलाइन पोर्टल पर समय पर जानकारी दर्ज नहीं किए जाने पर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने नाराजगी जताई। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि टीकाकरण कार्यक्रम में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया।
घर-घर सर्वे पर भी उठे सवाल
बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ क्षेत्रों में घर-घर सर्वेक्षण और बच्चों की पहचान का कार्य अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ। प्रशासन ने ऐसे मामलों में जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि छूटे हुए बच्चों तक पहुंच बनाकर उनका टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए और सभी नियमित टीकाकरण सत्रों की प्रभावी निगरानी की जाए।
सीएचओ और एएनएम को नोटिस
स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए अजमाइन उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और एएनएम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण, निगरानी और नियंत्रण गतिविधियों में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई गई। विभाग ने संबंधित कर्मचारियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
10 दिन बाद होगी दोबारा समीक्षा
जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए और टीकाकरण अभियान को तेज किया जाए। साथ ही आगामी 10 दिनों के भीतर स्थिति की दोबारा समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खसरा एक संक्रामक बीमारी है, जिससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है। ऐसे में अभिभावकों से अपील की गई है कि बच्चों का नियमित टीकाकरण अवश्य कराएं।