Snake Bite Alert: बारिश की दस्तक के साथ बढ़ीं सर्पदंश की घटनाएं, जानिए कैसे करें बचाव

मानसून में क्यों बढ़ जाता है सांपों का खतरा? डॉक्टरों ने बताए बचाव और प्राथमिक उपचार के जरूरी उपाय

बारिश का मौसम शुरू होते ही देश के कई राज्यों में सर्पदंश (Snake Bite) की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। खेतों, झाड़ियों, पानी भरे इलाकों और घरों के आसपास सांपों की आवाजाही बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरों में भी खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी-सी सावधानी बरतकर सर्पदंश की कई घटनाओं से बचा जा सकता है।

हर साल लाखों लोग होते हैं सर्पदंश का शिकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर वर्ष करीब 50 लाख (5 मिलियन) लोगों को सांप काटते हैं। इनमें लगभग 27 लाख लोगों में जहरीले विष (Envenoming) का असर होता है, जबकि 81 हजार से 1.38 लाख लोगों की मौत हो जाती है। लाखों लोग स्थायी विकलांगता का भी शिकार हो जाते हैं।

भारत सरकार के अनुसार, देश में हर साल 30 से 40 लाख तक सर्पदंश के मामले होने का अनुमान है। वहीं विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों में भारत में करीब 46 हजार से 58 हजार लोगों की हर साल सर्पदंश से मौत होने की बात सामने आई है।

बारिश में क्यों बढ़ जाती हैं सर्पदंश की घटनाएं?

मानसून के दौरान बिलों में पानी भर जाने से सांप सुरक्षित स्थान की तलाश में बाहर निकल आते हैं। खेत, घास, लकड़ी के ढेर, झाड़ियों और घरों के आसपास उनका आना-जाना बढ़ जाता है। इसी दौरान खेती-किसानी और खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों के संपर्क में आने से सर्पदंश की घटनाएं अधिक होती हैं।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करें।
  • खेतों या झाड़ियों में काम करते समय ऊंचे जूते और मोटे कपड़े पहनें।
  • घर के आसपास झाड़ियां और कचरा जमा न होने दें।
  • जमीन पर सोने से बचें, खासकर ग्रामीण इलाकों में।
  • लकड़ी, पत्थर या घास के ढेर में हाथ डालने से पहले सावधानी बरतें।

सांप काटने पर तुरंत क्या करें?

यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो घबराएं नहीं। मरीज को शांत रखें और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। प्रभावित अंग को ज्यादा हिलने न दें। घाव पर चीरा लगाने, जहर चूसने, बर्फ लगाने या कसकर रस्सी बांधने जैसी गलतियां बिल्कुल न करें। एंटी-स्नेक वेनम (ASV) ही इसका प्रभावी उपचार है और इसे केवल अस्पताल में ही दिया जाना चाहिए।

मानसून में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। समय पर इलाज और सही प्राथमिक उपचार से अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है। इसलिए सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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