पुणे। हाल ही में चर्चित हुए केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद महाराष्ट्र के पुणे जिले के पास स्थित लोहागढ़ (Lohagad) किला एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है। जहां एक ओर यह किला पुलिस जांच के कारण सुर्खियों में है, वहीं दूसरी ओर इसका इतिहास भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ा रहा है। सह्याद्रि पर्वतमाला की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित यह किला भारत के सबसे प्राचीन और रणनीतिक दुर्गों में गिना जाता है।
करीब 2,000 साल पुराना माना जाता है किला
इतिहासकारों के अनुसार लोहागढ़ किले का मूल निर्माण लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का माना जाता है। समय-समय पर इस किले पर सातवाहन, चालुक्य, राष्ट्रकूट, यादव, बहमनी, निजामशाही, मुगल और मराठा शासन का अधिकार रहा। इसकी सामरिक स्थिति के कारण अलग-अलग शासकों ने इसे मजबूत बनाया।
छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए था बेहद अहम
मराठा साम्राज्य के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज ने वर्ष 1648 में इस किले पर कब्जा किया था। बाद में संधियों और युद्धों के दौरान यह कुछ समय के लिए मुगलों के हाथ भी गया, लेकिन मराठाओं ने दोबारा इसे अपने नियंत्रण में ले लिया। माना जाता है कि यह किला मराठा शासन के लिए खजाने और सैन्य सामग्री रखने का सुरक्षित केंद्र भी था।
क्यों पड़ा नाम ‘लोहागढ़’
‘लोहागढ़’ का अर्थ है लोहे जैसा मजबूत किला। इसकी मजबूत पत्थर की दीवारें, संकरी चढ़ाई और प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था इसे दुश्मनों के लिए बेहद कठिन बनाती थीं। यही वजह है कि यह किला लंबे समय तक अभेद्य माना जाता रहा।
किले की सबसे खास पहचान
लोहागढ़ किले की सबसे प्रसिद्ध संरचना ‘विंचूकाटा’ (Vinchu Kata) है। यह बिच्छू की पूंछ जैसी दिखाई देने वाली लंबी चट्टानी दीवार है, जहां से आसपास की घाटियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है। यही स्थान ट्रैकर्स और पर्यटकों के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय है।
ट्रैकिंग के लिए भी मशहूर
लोनावला से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित यह किला हर साल हजारों पर्यटकों और ट्रैकिंग प्रेमियों को आकर्षित करता है। बरसात के मौसम में यहां हरियाली, झरने और बादलों के बीच ट्रैकिंग का अलग ही अनुभव मिलता है।
केतन हत्याकांड के बाद फिर चर्चा में
हाल ही में कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत के मामले में पुलिस जांच के दौरान यह किला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। शुरुआती जांच में इसे हादसा माना गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने इसे हत्या का मामला बताते हुए जांच आगे बढ़ाई। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी लोहागढ़ किले के इतिहास और भौगोलिक स्थिति को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई।
पर्यटन के लिहाज से क्यों खास है
- पुणे और लोनावला से आसान पहुंच
- ऐतिहासिक महत्व
- सह्याद्रि की मनोरम वादियां
- ट्रैकिंग और फोटोग्राफी के लिए प्रसिद्ध
- मानसून में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं
आज भी लोहागढ़ किला इतिहास, प्रकृति और रोमांच का अनूठा संगम माना जाता है। हालांकि हालिया आपराधिक घटना ने इसे नई चर्चा जरूर दी है, लेकिन इसकी ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता आज भी इसकी सबसे बड़ी पहचान है।