108 साल पुरानी संगीत परंपरा को मिली पहचान
मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को एक और बड़ी राष्ट्रीय पहचान मिली है। सतना जिले की मां शारदा की नगरी मैहर की विश्वविख्यात मैहर बैंड (मैहर वाद्यवृंद) को भारत सरकार की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage-ICH) सूची में शामिल किया गया है। करीब 108 वर्षों से भारतीय शास्त्रीय संगीत की इस अनूठी परंपरा ने देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। अब इस सम्मान के साथ इसके संरक्षण और संवर्धन को नई दिशा मिलेगी।
राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल हुआ मैहर बैंड
भारत सरकार की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में उन कला परंपराओं, लोक अभिव्यक्तियों और सांस्कृतिक धरोहरों को शामिल किया जाता है, जिनका ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मैहर बैंड को इस सूची में शामिल किया जाना न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।
इससे पहले मध्यप्रदेश की भगोरिया लोकनृत्य और गोंड चित्रकला भी इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान प्राप्त कर चुकी हैं।
108 साल पुरानी है मैहर बैंड की गौरवशाली परंपरा
मैहर बैंड की शुरुआत लगभग एक सदी पहले हुई थी। इस संगीत परंपरा ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्षों से यहां तैयार होने वाले कलाकारों ने देश और विदेश में मैहर की सांगीतिक पहचान को मजबूत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह मान्यता आने वाली पीढ़ियों तक इस विरासत को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी।
गुरुकुल की स्थापना से मिलेगा संरक्षण
संस्कृति विभाग के अनुसार मैहर की इस ऐतिहासिक संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए गुरुकुल की स्थापना की जाएगी। इसके माध्यम से युवा कलाकारों को पारंपरिक शैली में प्रशिक्षण दिया जाएगा और इस अनमोल धरोहर को संरक्षित करने का कार्य किया जाएगा।
संस्कृति विभाग ने जताई खुशी
अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने मैहर बैंड के कलाकारों और शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय स्वीकृति है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश की कला और संगीत परंपराओं को देशभर में नई पहचान मिलेगी। वहीं संस्कृति विभाग के संचालक एन.पी. नामदेव ने कहा कि प्रदेश सरकार लंबे समय से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मैहर बैंड का राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होना इन्हीं प्रयासों की महत्वपूर्ण सफलता है।
क्यों खास है यह उपलब्धि
- मैहर बैंड को भारत सरकार की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में स्थान मिला।
- करीब 108 साल पुरानी संगीत परंपरा को राष्ट्रीय संरक्षण मिलेगा।
- मैहर में गुरुकुल स्थापित कर नई पीढ़ी को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिली।