सतना जिले के मझगवां वन परिक्षेत्र के चर्चित सरभंगा टाइगर मौत मामले में वन विभाग को बड़ी कानूनी सफलता मिली है। शनिवार शाम गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को चित्रकूट स्थित प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी मिनता सिंह को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया। वहीं दूसरे आरोपी रामकुशल कोल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
रिमांड में कई अहम खुलासों की उम्मीद
वन विभाग अब पुलिस रिमांड के दौरान मुख्य आरोपी से गहन पूछताछ करेगा। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में घटना में शामिल अन्य लोगों, करंट लगाने की योजना और बाघ के शव को जंगल में दफनाने की पूरी साजिश से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में और कौन-कौन शामिल था तथा घटना के बाद सबूत मिटाने की योजना किसने बनाई।
करंट की चपेट में आई थी बाघ की जान
करीब दो महीने पहले सरभंगा सर्किल के कररिया बीट के कक्ष क्रमांक 820 में जंगली सुअर के शिकार के लिए अवैध रूप से करंट लगाया गया था। इसी करंट की चपेट में आने से एक बाघ की मौत हो गई थी। घटना के बाद आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से बाघ के शव को जंगल में गड्ढा खोदकर दफना दिया था। बाद में वन विभाग की विशेष टीम और डॉग स्क्वॉड ने मौके पर खुदाई कर बाघ का अस्थि-पंजर बरामद किया था, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
वन विभाग की कार्रवाई जारी
वन विभाग का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। रिमांड के दौरान मिलने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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