जंगली सूअर के लिए बिछाया था करंट का तार, फंस गया बाघ; दो महीने बाद खुला राज

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां वन परिक्षेत्र में बाघ की मौत का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वन विभाग को मुखबिर से मिली सूचना के बाद खुलासा हुआ कि करंट वाले बिजली के तार में फंसने से बाघ की मौत हो गई थी। घटना को छिपाने के लिए आरोपियों ने बाघ के शव को जंगल में गड्ढा खोदकर दफना दिया।

मुखबिर की सूचना के बाद शुरू हुई जांच

वन विभाग को सूचना मिली थी कि कुछ दिन पहले बाघ का शिकार कर उसका शव गायब कर दिया गया है। सूचना के बाद विभाग ने अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और क्षेत्र में जानकारी जुटाई।

सूचना की पुष्टि होने पर 2 जुलाई को डॉग स्क्वॉड, उड़नदस्ता दल और मझगवां वन परिक्षेत्र की टीम ने जंगल में सघन सर्चिंग अभियान चलाया। हालांकि लगातार बारिश और लैंटाना की घनी झाड़ियों के कारण मृत बाघ का पता नहीं चल सका।

चौकीदारों से पूछताछ में सामने आया सच

जांच के दौरान मुखबिर ने शिकार की घटना में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात एक स्थानीय चौकीदार की संलिप्तता की जानकारी दी। इसके बाद 3 जुलाई को दो चौकीदारों से पूछताछ की गई।

पूछताछ में सामने आया कि करीब दो माह पहले जंगली सूअर के शिकार के उद्देश्य से एक स्थानीय चौकीदार के परिवार के सदस्य ने जंगल में बिजली का तार बिछाया था। उसी करंट वाले तार की चपेट में आने से बाघ की मौत हो गई।

शव को जंगल में दफनाया गया

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि घटना के बाद मामला छिपाने के लिए बाघ के शव को जंगल के भीतर गड्ढा खोदकर दफना दिया गया था। आरोपियों ने वन विभाग को वह स्थान भी बताया, जहां शव दबाया गया था।

डीएफओ के नेतृत्व में खुदाई जारी

डीएफओ मयंक चांदीवाल के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ के अवशेष निकालने के लिए खुदाई शुरू कर दी। अधिकारियों के अनुसार अवशेष मिलने के बाद पोस्टमार्टम और अन्य वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

वन विभाग ने बताया कि मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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