पद्म विभूषण तीजन बाई नहीं रहीं, रायपुर AIIMS में ली अंतिम सांस

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पंडवानी गायन को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित प्रसिद्ध लोक कलाकार तीजन बाई का 69 वर्ष की आयु में रविवार तड़के रायपुर AIIMS में निधन हो गया। वह पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार थीं और अस्पताल के आईसीयू में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे देश के कला जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई।

कई दिनों से चल रहा था इलाज

जानकारी के अनुसार, तीजन बाई पिछले करीब 38 दिनों से रायपुर AIIMS में भर्ती थीं। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी था, लेकिन रविवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली। हाल के दिनों में उनकी तबीयत लगातार नाजुक बनी हुई थी।

पंडवानी को दुनिया भर में दिलाई पहचान

तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पंडवानी शैली को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को अपनी सशक्त प्रस्तुति और अनूठी शैली में प्रस्तुत कर उन्होंने लोककला को नई पहचान दी। इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी सहित कई देशों में उन्होंने अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय लोक संस्कृति का गौरव बढ़ाया।

कई राष्ट्रीय सम्मानों से हुईं सम्मानित

लोककला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार भी प्राप्त हुए।

गांव में होगा अंतिम संस्कार

परिजनों के अनुसार, तीजन बाई का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव गनियारी ले जाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय और पारंपरिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में कलाकार, जनप्रतिनिधि और प्रशंसकों के पहुंचने की संभावना है। तीजन बाई का निधन भारतीय लोक संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवनभर पंडवानी परंपरा को जीवंत रखा और उसे वैश्विक मंचों तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई दी।

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