अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, आरोपी मंदिर परिसर से कुछ दूरी पर स्थित एक सुनसान स्थान पर नियमित रूप से इकट्ठा होते थे। यहीं कथित तौर पर चोरी की गई रकम का हिसाब लगाया जाता था और आपस में उसका बंटवारा किया जाता था।
मंदिर परिसर से दूर चुना गया था ‘सीक्रेट अड्डा’
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने ऐसा स्थान चुना था जहां आम लोगों की आवाजाही बेहद कम रहती थी। पुलिस का मानना है कि इसी वजह से वे लंबे समय तक संदेह से बचते रहे। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस स्थान की जानकारी सामने आई है।
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CCTV से बचने की भी बनाई थी रणनीति
जांच में पहले ही सामने आ चुका है कि आरोपी कथित तौर पर मंदिर परिसर के उन हिस्सों का इस्तेमाल करते थे जहां CCTV की निगरानी सीमित थी। पुलिस का दावा है कि चोरी के बाद रकम को अस्थायी रूप से छिपाया जाता था और बाद में सुनसान स्थान पर ले जाकर उसका बंटवारा किया जाता था।
SUV से ले जाई जाती थी नकदी
जांच के दौरान पुलिस ने एक SUV की भी पहचान की है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर नकदी और अन्य सामान ले जाने में किया गया। अधिकारियों को आशंका है कि चोरी की रकम के अलावा सोना और चांदी जैसी अन्य कीमती वस्तुएं भी अलग-अलग स्थानों पर छिपाई गई हो सकती हैं।
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
SIT और पुलिस अब आरोपियों के वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच कर रही है। शुरुआती जांच में पिछले कुछ वर्षों के रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा (री-ऑडिट) का फैसला भी लिया गया है, ताकि कथित गड़बड़ियों की पूरी तस्वीर सामने आ सके।
6 जुलाई की ट्रस्ट बैठक पर टिकी नजर
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आपात बैठक 6 जुलाई को प्रस्तावित है। बैठक में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट, प्रशासनिक सुधार, CEO की नियुक्ति और मामले से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
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