अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच के बीच पूर्व महासचिव चंपत राय के विशेष जांच दल (SIT) को दिए गए कथित गोपनीय बयान के कुछ अंश मीडिया में सामने आने का दावा किया गया है। इन दावों में चंपत राय ने दानपात्र की रकम की गिनती, बैंक में जमा करने की प्रक्रिया और एमओयू से खुद को अलग बताया है। हालांकि, इस कथित बयान की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है और जांच अभी जारी है।
क्या है कथित लीक बयान
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कथित बयान में चंपत राय ने कहा है कि दानपात्र से निकली रकम की गिनती, उसकी सुरक्षा, बैंक तक पहुंचाने की व्यवस्था और बैंक के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MOU) से उनका सीधा संबंध नहीं था। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि उन्होंने जांच एजेंसी को बताया कि संबंधित एमओयू पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और प्रशासनिक निर्णयों की जानकारी भी उन्हें नहीं थी। इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
यह भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा केस: दोस्त, रिश्तेदार और कार… पुलिस पूछताछ में सामने आई 19 लाख की कहानी
अनिल मिश्रा की भूमिका पर बढ़े सवाल
कथित बयान सामने आने के बाद ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच एजेंसियां प्रशासनिक जिम्मेदारियों और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों की भी पड़ताल कर रही हैं। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
यह भी पढ़ें: RAM MANDIR TRUST: क्या आसान होगी इस पूर्व IFS अधिकारी की राह
चंपत राय ने क्या कहा
कथित बयान की चर्चा से पहले चंपत राय ने रामभक्तों के नाम एक खुला पत्र जारी किया था। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वह SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद हर आरोप का बिंदुवार जवाब देंगे। उन्होंने फिलहाल सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है।
पुलिस और SIT का रुख
अयोध्या पुलिस पहले ही कह चुकी है कि SIT के समक्ष दर्ज बयान और पूछताछ की जानकारी गोपनीय है। ऐसे में मीडिया में सामने आए कथित बयान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही जिम्मेदारियों और तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
यह भी पढ़ें: ‘मेरी नजर में चंपत राय बेदाग हैं’, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि का बचाव