NH-43 की कहानी: 11 साल का इंतजार, अबकि सेंसर चोरी… हाईवे निर्माण फिर अटका

शहडोल और उमरिया के बीच नेशनल हाईवे-43 की 73 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण पिछले 11 वर्षों से जारी है। परियोजना पहले ही सुस्त रफ्तार का शिकार थी, लेकिन अब 35 लाख रुपये के एक सेंसर की चोरी ने निर्माण कार्य को करीब 20 दिनों तक पूरी तरह रोक दिया।जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण में लगी कंक्रीट पेवर मशीन एक निजी कंपनी से किराए पर ली गई थी। 10 जून को मशीन का संचालन करने वाले ऑपरेटर अशरान खान और उसके साथी शान खान कथित रूप से मशीन में लगा करीब 35 लाख रुपये कीमत का सेंसर निकालकर अपने गांव, विदिशा जिले के नादिया गांव, चले गए। बताया जा रहा है कि ऑपरेटर को पिछले चार महीने से वेतन नहीं मिला था, जिससे वह नाराज था।

सेंसर गया तो मशीन भी थम गई

सेंसर चोरी होते ही करोड़ों रुपये की सड़क परियोजना की सबसे अहम मशीन बंद हो गई। नतीजा यह हुआ कि निर्माण कार्य लगभग 20 दिनों तक प्रभावित रहा। ठेकेदार ने उमरिया जिले की घुनघुटी चौकी में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस जांच में जुटी।

पुलिस पहुंची तो आरोपी भागे, सेंसर छोड़ गए

जांच के दौरान पुलिस विदिशा जिले के नादिया गांव पहुंची। पुलिस के मुताबिक ग्रामीणों ने पहले आरोपियों के शाम तक आने की बात कही, लेकिन बाद में जब पुलिस लौट रही थी तो कुछ लोग सेंसर छोड़कर मौके से भाग गए। बरामद सेंसर को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद संबंधित कंपनी को वापस सौंप दिया गया। अब मशीन को दोबारा काम पर लगाया जा रहा है।

11 साल से अधूरी है 73 किलोमीटर की सड़क

यह परियोजना सिर्फ सेंसर चोरी की वजह से चर्चा में नहीं है। 73 किलोमीटर लंबी सड़क 11 साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) पहले भी निर्माण की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जता चुका है। अप्रैल में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने दो महीने में काम तेज करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीन पर खास बदलाव नहीं दिखा।

सिर्फ ठेकेदार बदला, रफ्तार नहीं

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि परियोजना में कंपनी का नाम जरूर बदला, लेकिन काम करने वाली टीम लगभग वही रही। यही वजह है कि निर्माण की गति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। उधर मोर्चा और पाली रेलवे ओवरब्रिज के एप्रोच रोड का काम भी धीमी रफ्तार से चल रहा है।

एमपीआरडीसी के जिला प्रबंधक अवधेश स्वर्णकार ने बताया कि पठारी फाटक पर गर्डर लॉन्चिंग के लिए रेलवे से ब्लॉक मांगा गया है। इस संबंध में बिलासपुर मंडल के डीआरएम से चर्चा हुई है और अगले तीन-चार दिनों में समय मिलने की उम्मीद है।

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