दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद मचे सियासी घमासान के बीच शनिवार देर रात मुख्यमंत्री आवास पर हुई मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा छोड़ने की अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ कर दिया कि वह पार्टी के साथ हैं और अधिकृत प्रत्याशी के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे। बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी मौजूद रहे। करीब एक घंटे तक चली चर्चा के बाद नरोत्तम मिश्रा बाहर आए और मीडिया से बातचीत की।
भाजपा छोड़ने की अटकलों पर लगाया विराम
पिछले दो दिनों से यह चर्चा तेज थी कि टिकट नहीं मिलने के बाद नरोत्तम मिश्रा कोई बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उन्होंने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वे भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता हैं और पार्टी के फैसले का सम्मान करते हैं।
‘पार्टी प्रत्याशी के साथ रहूंगा’
नरोत्तम मिश्रा ने स्पष्ट किया कि दतिया उपचुनाव में भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के नामांकन के दौरान वह स्वयं मौजूद रहेंगे। इतना ही नहीं, चुनाव प्रचार में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने समर्थकों से एक बार फिर अपील की कि किसी भी तरह का विरोध-प्रदर्शन या अनुशासनहीनता पार्टी के हित में नहीं है।
टिकट कटने के बाद भड़का था विरोध
भाजपा द्वारा दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। कई जगह सड़क जाम, नारेबाजी और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं भी सामने आई थीं। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से समर्थकों से शांति बनाए रखने और संगठन के फैसले का सम्मान करने की अपील की थी।
क्या खत्म हो गया दतिया का सियासी संकट
मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक को भाजपा के ‘डैमेज कंट्रोल’ के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नरोत्तम मिश्रा के सार्वजनिक बयान के बाद फिलहाल भाजपा के भीतर पैदा हुआ असंतोष कुछ हद तक शांत हो सकता है। हालांकि, उपचुनाव के दौरान दतिया की सियासत पर सभी की नजर बनी रहेगी।
यह भी पढ़ें: दतिया बवाल: जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से कहा- ‘मध्यप्रदेश नहीं जलना चाहिए’