राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नए खुलासे: SIT ने गिनाईं बड़ी चूकें, ट्रस्ट ने बदले नियम; कांग्रेस ने फिर उठाए सवाल

अयोध्या/नई दिल्ली। राम मंदिर चढ़ावा विवाद में जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर की दान पेटियों के संचालन और चढ़ावा गिनने की व्यवस्था में कई गंभीर प्रशासनिक खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। वहीं कांग्रेस ने मामले को लेकर केंद्र सरकार और ट्रस्ट पर हमला तेज करते हुए स्वतंत्र एवं न्यायिक निगरानी में जांच की मांग दोहराई है।

SIT रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया

SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास दान पेटियों की चाबियां बिना औपचारिक अनुमति के थीं। जांच में इसे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चढ़ावे की गिनती और नकदी के प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रियाओं में पर्याप्त निगरानी नहीं थी। इसी वजह से आरोपियों को लंबे समय तक कथित अनियमितताओं का अवसर मिला।

ये भी पढ़ें: RAM MANDIR TRUST: चढ़ावे की रकम कहां गई? अब कारोबार और निवेश के एंगल से जांच

जांच अब किन बिंदुओं पर पहुंची

जांच एजेंसियां अब वित्तीय लेन-देन की भी गहराई से पड़ताल कर रही हैं। अब तक की कार्रवाई में:

  • 8 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
  • आरोपियों और उनके परिजनों से जुड़े करीब 50 बैंक खातों की जांच हो रही है।
  • नकदी, आभूषण और एक कार बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
  • जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि कथित गबन की रकम किन-किन माध्यमों से खर्च की गई।

ट्रस्ट ने क्या बदला

विवाद सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान गिनने की पूरी व्यवस्था में कई बदलाव लागू किए हैं।

नई व्यवस्था के तहत:

  • QR आधारित पहचान पत्र (QR-enabled ID) अनिवार्य किए गए।
  • कर्मचारियों की डिजिटल ट्रैकिंग शुरू की गई।
  • सुरक्षा जांच और प्रवेश व्यवस्था को पहले से अधिक सख्त बनाया गया।
  • CCTV निगरानी और रिकॉर्डिंग पर अतिरिक्त फोकस किया गया।
  • दान गिनने की प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने के लिए नए प्रशासनिक प्रोटोकॉल लागू किए गए।

रिपोर्टों के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद दान गिनने वाले कर्मचारियों में से बड़ी संख्या ने इस्तीफा भी दिया है।

कांग्रेस ने क्या कहा

कांग्रेस ने इस मुद्दे को राजनीतिक और नैतिक जवाबदेही से जोड़ते हुए अपनी मांग दोहराई। पार्टी नेताओं ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराई जानी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। यदि जांच में प्रशासनिक या संस्थागत जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके लिए भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। पार्टी ने वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए फोरेंसिक ऑडिट की मांग भी दोहराई।

पहले क्या हुआ था

यह मामला तब सामने आया था जब मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) गठित किया। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके बाद ट्रस्ट में प्रशासनिक फेरबदल और दान प्रबंधन प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया भी शुरू हुई।

ये भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर नृपेंद्र मिश्रा बोले- ‘ये कलंक है, हम सब छोटा महसूस कर रहे हैं’


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *