अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। पुलिस अब दो और आरोपियों को रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि कथित गबन की रकम, मनी ट्रेल और पूरे नेटवर्क के बारे में अधिक जानकारी जुटाई जा सके। इसी बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने जांच पूरी होने तक अयोध्या में ही रहने का फैसला किया है।
दो और आरोपियों से होगी पूछताछ
सूत्रों के अनुसार, SIT का मानना है कि अभी कई अहम सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। इसी वजह से दो और आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित रूप से चढ़ावे की रकम का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
अब तक जांच में क्या सामने आया
जांच के दौरान अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस आरोपियों और उनके परिजनों से जुड़े करीब 50 बैंक खातों की जांच कर रही है। इसके अलावा नकदी, आभूषण और एक लग्जरी कार भी बरामद की गई है। जांच एजेंसियां कथित मनी ट्रेल को जोड़ने में जुटी हैं।
SIT रिपोर्ट में सामने आई बड़ी चूक
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में मुख्य आरोपियों में शामिल रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास दान पेटियों की चाबियां बिना औपचारिक अनुमति होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में इसे मंदिर की दान प्रबंधन प्रणाली की गंभीर प्रक्रियागत खामी बताया गया है।
जांच तक अयोध्या नहीं छोड़ेंगे राय
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पूर्व महासचिव चंपत राय जांच पूरी होने तक अयोध्या में ही रहेंगे और जांच एजेंसियों को आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध रहेंगे। इसी बीच ट्रस्ट ने उनके और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के विशेष दर्शन (VIP Darshan) से जुड़े डिजिटल अधिकार भी निष्क्रिय कर दिए हैं। यह कदम जांच प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
रामभक्तों के नाम चम्पत की पाती
इस बीच, ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने 7 जुलाई को अपने आधिकारिक X अकाउंट पर ‘रामभक्तों के नाम पाती’ साझा करते हुए कहा था कि वह ‘मौन व्रत’ पर हैं और SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद सभी आरोपों का जवाब देंगे। उन्होंने यह भी लिखा था कि उनका 45 वर्षों का सार्वजनिक जीवन ‘खुली पुस्तक’ की तरह रहा है।
ट्रस्ट में पहले ही हो चुके हैं बड़े बदलाव
चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कई प्रशासनिक बदलाव किए जा चुके हैं। महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद छोड़े, जबकि ट्रस्ट ने नए CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है। साथ ही दान गिनने की व्यवस्था, डिजिटल निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल को भी सख्त किया गया है। SIT की जांच अभी जारी है। यदि रिमांड के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। एजेंसियों का फोकस फिलहाल कथित गबन की पूरी रकम का हिसाब, मनी ट्रेल और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका स्पष्ट करने पर है।
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