वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी विवाद में अदालत के बाहर समझौते की संभावना फिलहाल खत्म होती दिख रही है। हिंदू और मुस्लिम, दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता पहल को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने लंबे समय से लंबित धार्मिक स्थल विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान की संभावना तलाशने के लिए ‘समाधान समारोह’ के तहत मध्यस्थता का विकल्प सुझाया था। इस पहल में वाराणसी के ज्ञानवापी, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया था।
अदालत से ही चाहते हैं अंतिम फैसला
सुनवाई के दौरान हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि यह मामला संवेदनशील और कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में वे किसी समझौते या मध्यस्थता के बजाय अदालत के अंतिम निर्णय को ही स्वीकार करेंगे। दोनों पक्षों ने न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताया।
क्या है ज्ञानवापी विवाद
ज्ञानवापी परिसर को लेकर कई याचिकाएं विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां पहले मंदिर था, जबकि मुस्लिम पक्ष मस्जिद के अपने अधिकार का दावा करता है। मामले से जुड़े कई कानूनी प्रश्न अलग-अलग अदालतों में विचाराधीन हैं, जिन पर अंतिम फैसला अभी आना बाकी है। (यह पृष्ठभूमि विवादित दावों का तटस्थ विवरण है; अदालत द्वारा इन दावों पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।)
आगे क्या होगा
दोनों पक्षों द्वारा मध्यस्थता से इनकार किए जाने के बाद अब यह विवाद पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ेगा। ऐसे में सभी की नजरें अदालत की आगामी सुनवाई और भविष्य के फैसलों पर रहेंगी।