देशभर में मानसून पूरी तरह सक्रिय है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के INSAT-3DS सैटेलाइट बुलेटिन ने इसकी पुष्टि की है। ताजा थर्मल इंफ्रारेड (IR) तस्वीरों में उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के बड़े हिस्से पर घने बादल दिखाई दे रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी के कारण अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में भारी बारिश की स्थिति बनी रह सकती है।
INSAT-3DS की तस्वीरों में दिखा मानसून का असर
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी INSAT-3DS Thermal Infrared Satellite Bulletin में 19 जुलाई की सैटेलाइट तस्वीरों में भारत के बड़े हिस्से पर घने बादलों का फैलाव दिखाई दे रहा है। उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत, पूर्वी भारत और बंगाल की खाड़ी तक बादलों की व्यापक मौजूदगी इस बात का संकेत है कि मानसून पूरी तरह सक्रिय है।
थर्मल इंफ्रारेड इमेज में चमकीले सफेद क्षेत्र ऊंचे और अत्यधिक ठंडे बादलों (Deep Convective Clouds) को दर्शाते हैं। ऐसे बादल आमतौर पर तेज बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने जैसी मौसमीय गतिविधियों से जुड़े होते हैं।
पश्चिमी विक्षोभ बना बड़ी वजह
IMD के सैटेलाइट बुलेटिन में स्पष्ट रूप से Western Disturbance (WD) का उल्लेख किया गया है। यह पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के ऊपर सक्रिय है। इसके कारण इन क्षेत्रों में बहु-स्तरीय घने बादल बने हुए हैं और बारिश तथा गरज-चमक की गतिविधियां तेज बनी हुई हैं।
बंगाल की खाड़ी से मिल रही लगातार नमी
सैटेलाइट तस्वीरों में बंगाल की खाड़ी से उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर फैली बादलों की लंबी पट्टी भी साफ दिखाई दे रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यही नमी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच रही है, जिससे कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं।
उत्तर और मध्य भारत में सबसे ज्यादा असर
सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण से पता चलता है कि सबसे घने बादल उत्तर भारत और मध्य भारत के ऊपर हैं। इन क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका बनी रह सकती है। पूर्वोत्तर भारत में भी व्यापक बादल छाए हुए हैं।
दक्षिण भारत में भी सक्रिय है मानसून
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से मिल रही नमी के कारण कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के कुछ हिस्सों में भी बादलों की सक्रियता बनी हुई है। दक्षिण प्रायद्वीप के ऊपर दिखाई दे रही बादलों की पट्टियां सामान्य से बेहतर मानसूनी गतिविधि का संकेत दे रही हैं।
क्या पूरे देश में होगी भारी बारिश
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे देश में एक जैसी बारिश नहीं होगी। जहां अत्यधिक ठंडे और ऊंचे संवहनीय (Convective) बादल मौजूद हैं, वहीं भारी बारिश की संभावना अधिक है। अन्य क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसलिए स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और IMD की चेतावनियों पर नजर रखना जरूरी है।
INSAT-3DS क्यों है महत्वपूर्ण
INSAT-3DS भारत का आधुनिक मौसम उपग्रह है, जो बादलों की ऊंचाई, तापमान, नमी और विभिन्न मौसम प्रणालियों की लगातार निगरानी करता है। इसी डेटा के आधार पर IMD भारी बारिश, चक्रवात, आंधी और अन्य मौसम संबंधी चेतावनियां जारी करता है।
लोग क्या सावधानी बरतें?
- अपने जिले के लिए IMD की ताजा मौसम चेतावनी देखें।
- भारी बारिश वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचें।
- नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
- बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान या पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
- स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।