इस वर्ष नागपंचमी का पर्व सावन के तीसरे सोमवार के साथ पड़ रहा है। भगवान शिव और नाग देवता की आराधना के लिए यह संयोग बेहद शुभ माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिव पूजा और नाग देवता की आराधना करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी का शुभ संयोग
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, जबकि नागपंचमी नाग देवता की पूजा का प्रमुख पर्व है। इस वर्ष दोनों का एक ही दिन पड़ना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने के साथ नाग देवता की पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के गले में विराजमान नाग देवता शक्ति, संरक्षण और निर्भयता के प्रतीक हैं। ऐसे में सोमवार और नागपंचमी का एक साथ आना श्रद्धालुओं के लिए विशेष पूजा-अर्चना का अवसर माना जा रहा है।
नागपंचमी का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में नागों को केवल एक जीव नहीं, बल्कि प्रकृति और सृष्टि के संतुलन का प्रतीक माना गया है। भगवान विष्णु शेषनाग पर विराजमान हैं, जबकि भगवान शिव नागों को अपने आभूषण के रूप में धारण करते हैं। इसलिए नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार की सुख-समृद्धि बनी रहती है, भय और संकट दूर होते हैं तथा भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस दिन कैसे करें पूजा
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान शिव और नाग देवता का ध्यान करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें।
- नाग देवता के चित्र या प्रतिमा पर हल्दी, कुंकुम, पुष्प और अक्षत चढ़ाएं।
- ‘ॐ नमः शिवाय’ तथा नाग देवता के मंत्रों का जाप करें।
- नागपंचमी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
- परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना करें।
क्या करें
- भगवान शिव और नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
- जरूरतमंद लोगों को अन्न या वस्त्र का दान दें।
- प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण का संकल्प लें।
क्या नहीं करें
- किसी भी सांप या अन्य वन्यजीव को पकड़ने या परेशान करने की कोशिश न करें।
- अंधविश्वास के कारण जीवित सांपों को दूध पिलाने से बचें।
- वन्यजीव संरक्षण कानूनों का सम्मान करें।
क्या जीवित सांप को दूध पिलाना उचित है
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार सांप स्वाभाविक रूप से दूध नहीं पीते। इसलिए जीवित सांपों को पकड़कर दूध पिलाना न तो वैज्ञानिक दृष्टि से उचित है और न ही वन्यजीव संरक्षण की भावना के अनुरूप। श्रद्धालु मंदिरों में प्रतीकात्मक रूप से नाग देवता की पूजा कर सकते हैं।