यहां होती है खंडित शिवलिंग की पूजा!

महाकाल के उपलिंग के नाम से भी जाने जाते हैं गैविनाथ

अगर आपके घर में रखी किसी भी देवी देवता की प्रतिमा खंडित हो जाती है तो आप अनहोनी की आशंका मात्र से सिहर उठते हैं। जरा भी देरी किए लोग खंडित मूर्ति को या तो बहते पानी में विसर्जित कर देते हैं या फिर किसी पेड़ के नीचे रख देते हैं। मगर आज आपकी हम बताएंगे कि खंडित शिवलिंग की आराधना कहां होती है। मध्यप्रदेश के सतना मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है बिरसिंहपुर कस्बा। इसी कस्बे में तालाब किनारे शिवलिंग रूप में विराजते हैं भगवान भोलेनाथ। किवदंती के अनुसार कभी यह देवपुर नगरी हुआ करती थी… राजा थे वीरसिंह…। राजा वीर सिंह उज्जैन महाकाल के अनन्य भक्त थे। राजा रोजाना यहां से उज्जैन जाकर महाकाल के दर्शन करते थे। बाद में राजा वृद्ध हो गए तो वो उज्जैन जाने में असमर्थ रहने लगे। इस पर उन्होंने महाकाल से बिरसिंहपुर आने के लिए कहा। महाकाल उनकी भक्ति से इतने अभिभूत हुए कि वो बिरसिंहपुर में गैवीनाथ के घर शिवलिंग के रूप में प्रकट हो गए।

औरंगजेब की सेना ने शिवलिंग पर किए वार
बुतपरस्ती के खिलाफ रहे औरंगजेब की सेना ने शिवलिंग के ऊपर तलवार से वार कर दिया था। इस वार से शिवलिंग 5 हिस्सों में बंट गया। कहते हैं जब शिवलिंग पर पहला वार हुआ तो उससे गंगा की धारा बही। दूसरे घाव से खून और मवाद बहने लगा। तीसरे वार से दूध की धारा, चौथे वार पर बिच्छु, बरैया और पांचवें वार में शिवलिंग से बड़ी मख्खियां निकलने लगी। मख्खियों ने औरंगजेब की सारी सेना को काटना शुरू किया और खदेड़ दिया। बादशाह समेत सेना मूर्छित हो गई। वहीं पर औरंगजेब ने माफी मांगी कि मैं हिन्दुओं की मूर्तियों की परीक्षा नहीं लूंगा। कालांतर में शिवलिंग के दो घाव तो भर गए मगर आज भी शिवलिंग 3 हिस्सों में विभाजित दिखता है।
मन्नत पूरी होने पर शंकर-पार्वती का गठबंधन
 गैवीनाथ धाम आज अटूट श्रद्धा का केंद्र है। लोग बड़ी संख्या में यहां मनौती लेकर आते हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु शिव और पार्वती का गठबंधन करते हैं। एक छोर से दूसरे छोर तक विशाल तालाब के ऊपर से शंकर-पार्वती का गठबंधन किया जाता है। सावन में यहां भक्तों का रेला उमड़ पड़ता है। जल और बिल्वपत्र चढ़ाने के लिए होड़ मच जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *