Digital Arrest में महिला से 1.57 करोड़ की ठगी

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 69 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला अधिकारी को कथित तौर पर 33 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर साइबर ठगों ने ₹1.57 करोड़ से अधिक की रकम ठग ली। ठग खुद को दूरसंचार विभाग, दिल्ली पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताकर महिला और उसके परिवार को लगातार डराते रहे।

पुलिस के अनुसार, महिला को सबसे पहले एक कॉल आया जिसमें दावा किया गया कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हुआ है। इसके बाद उन्हें बताया गया कि उनका नाम एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ा है और जांच एजेंसियां उन्हें गिरफ्तार कर सकती हैं। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से महिला ठगों के जाल में फंसती चली गईं।

33 दिन तक मानसिक दबाव में रखा

जांच में सामने आया है कि ठगों ने महिला को लंबे समय तक वीडियो कॉल और फोन कॉल के जरिए निगरानी में रखा। उन्हें बार-बार चेतावनी दी गई कि यदि उन्होंने किसी को जानकारी दी तो तुरंत गिरफ्तारी हो जाएगी। इसी दौरान उनसे कई बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई।

पुलिस का कहना है कि ठगों ने नकली दस्तावेज, फर्जी पहचान पत्र और कथित जांच से जुड़े कागजात दिखाकर भरोसा जीतने की कोशिश की। महिला को यह विश्वास दिलाया गया कि रकम ‘सत्यापन’ के बाद वापस कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?

‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे वीडियो कॉल पर फर्जी पूछताछ करते हैं और गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठते हैं।

बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर

देशभर में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में तेजी आई है। हाल के महीनों में कई बुजुर्गों और रिटायर्ड अधिकारियों से लाखों और करोड़ों रुपये की ठगी के मामले सामने आए हैं। साइबर अपराधी विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हैं क्योंकि वे सरकारी एजेंसियों के नाम से आसानी से भयभीत हो सकते हैं।

ऐसे बचें डिजिटल अरेस्ट ठगी से

  • किसी भी फोन कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें।
  • वीडियो कॉल पर दिखाई गई वर्दी, आईडी कार्ड या दस्तावेज को असली न मानें।
  • कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती।
  • डराने या गोपनीयता बनाए रखने के दबाव में कोई वित्तीय जानकारी साझा न करें।
  • संदेह होने पर 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।

ग्वालियर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जिन खातों में रकम भेजी गई, उन्हें ट्रेस करने की कार्रवाई की जा रही है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में शुरुआती घंटों में शिकायत दर्ज होने पर रकम रिकवर होने की संभावना बढ़ जाती है।

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