पटना। NEET UG 2026 री-एग्जाम में सामने आए फर्जीवाड़े की जांच आगे बढ़ने के साथ नए खुलासे हो रहे हैं। पहले 30 लोगों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई थी, लेकिन अब जांच में पता चला है कि गिरफ्तार आरोपियों में 9 डमी (इम्पर्सोनेटर) उम्मीदवार, 18 बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कर्मचारी और कुछ MBBS छात्र भी शामिल हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि कथित फर्जीवाड़ा केवल बाहरी सॉल्वर गैंग तक सीमित नहीं था, बल्कि परीक्षा केंद्र के भीतर तक इसकी पहुंच थी।
डमी उम्मीदवारों को दिलाई जा रही थी एंट्री
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा दिलाने की कोशिश कर रहा था। आरोप है कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में सेंध लगाकर डमी उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाया गया।
मेडिकल छात्र भी जांच के घेरे में
पुलिस जांच में कुछ MBBS छात्रों की भूमिका भी सामने आई है। अधिकारियों को आशंका है कि ये छात्र पैसे लेकर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने या सॉल्वर नेटवर्क का हिस्सा बनने का काम कर रहे थे। इस संबंध में उनसे पूछताछ जारी है।
बायोमेट्रिक स्टाफ की भूमिका सबसे अहम
इस मामले का सबसे बड़ा खुलासा यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में बड़ी संख्या में बायोमेट्रिक ऑपरेटर और परीक्षा केंद्र से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सत्यापन प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितता हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच
पुलिस को शक है कि यह संगठित गिरोह केवल एक जिले या एक राज्य तक सीमित नहीं है। डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों और मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर नेटवर्क की अन्य कड़ियों की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
NTA का पक्ष
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) का कहना है कि री-एग्जाम कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच कराया गया था। एजेंसी के अनुसार स्थानीय स्तर पर मिली शिकायतों के आधार पर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की और पूरे मामले की जांच जारी है।