लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने प्रदेश संगठन का नया ढांचा घोषित कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष जोर दिया गया है। संगठन में ओबीसी, दलित, ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य और महिला नेताओं को प्रतिनिधित्व देने के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध, पूर्वांचल, ब्रज, कानपुर-बुंदेलखंड और काशी क्षेत्र के नेताओं को भी अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव 2024 के बाद भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की रणनीति अपनाई है।
106 सदस्यीय टीम का ऐलान
भाजपा ने प्रदेश संगठन में 106 पदाधिकारियों की घोषणा की है। इनमें—
- 19 प्रदेश उपाध्यक्ष
- 7 प्रदेश महामंत्री
- 16 प्रदेश मंत्री
- 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष
- कोषाध्यक्ष एवं सह-कोषाध्यक्ष
- मुख्यालय प्रभारी
- मीडिया एवं सोशल मीडिया टीम
- प्रवक्ता और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी शामिल हैं।
इन नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी
नई टीम में कई पुराने और नए चेहरों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
प्रदेश उपाध्यक्ष
- पंकज सिंह
- पूजा पाल
- सलिल विश्नोई
- मोहित बेनीवाल
- मानवेंद्र सिंह
- संतोष सिंह
- विजय बहादुर पाठक
- कामेश्वर सिंह
- अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी उपाध्यक्ष बनाया गया है।
प्रदेश महामंत्री
प्रदेश महामंत्री के रूप में जिन नेताओं को जिम्मेदारी मिली है, उनमें प्रमुख हैं—
- सुब्रत पाठक
- गोविंद नारायण शुक्ला
- सुरेश तिवारी
- प्रियंका रावत
- अन्य वरिष्ठ संगठनात्मक नेताओं को भी महामंत्री बनाया गया है।
संगठन महामंत्री
- धर्मपाल सिंह को संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी पहले की तरह बरकरार रखी गई है। संगठन विस्तार और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी।
छह क्षेत्रों में नए क्षेत्रीय अध्यक्ष
भाजपा ने प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में भी नए क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त किए हैं, ताकि हर क्षेत्र में संगठन को मजबूत किया जा सके और स्थानीय सामाजिक समीकरणों के अनुरूप चुनावी तैयारी की जा सके।
ओबीसी और महिलाओं पर विशेष फोकस
नई टीम में गैर-यादव ओबीसी समुदाय के नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसके साथ ही महिला नेताओं को भी महत्वपूर्ण पद सौंपे गए हैं। राजनीतिक जानकार इसे समाजवादी पार्टी की PDA रणनीति के मुकाबले भाजपा की नई सामाजिक रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
नए और अनुभवी नेताओं का संतुलन
भाजपा ने संगठन में अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी मौका दिया है। पार्टी का मानना है कि इससे संगठन में नई ऊर्जा आएगी और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ेगी।
2027 चुनाव की रणनीति का हिस्सा
विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। भाजपा का फोकस अब बूथ प्रबंधन, लाभार्थी संपर्क अभियान, पिछड़े वर्गों तक पहुंच और नए मतदाताओं को जोड़ने पर रहेगा। आने वाले महीनों में प्रदेशभर में संगठनात्मक बैठकों और जनसंपर्क अभियानों की रफ्तार बढ़ाई जाएगी।