भोपाल। मध्यप्रदेश में इस बार मानसून का इंतजार सामान्य से अधिक लंबा हो गया है। आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 15–16 जून के आसपास प्रदेश में प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी पड़ने से कई जिलों में लोग भीषण गर्मी और उमस से परेशान रहे। हालांकि अब मौसम विभाग का कहना है कि परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और अगले कुछ दिनों में प्रदेश के बड़े हिस्से में मानसून सक्रिय होने की संभावना है।
आखिर क्यों लेट हुआ मानसून
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार मानसून की रफ्तार कई मौसम प्रणालियों के कारण प्रभावित हुई।
- अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर रहीं।
- बीच में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने मानसून की उत्तर और मध्य भारत की ओर बढ़ने की गति को धीमा कर दिया।
- प्रशांत महासागर में विकसित हो रही El Niño जैसी परिस्थितियों का भी मानसूनी गतिविधियों पर असर देखने को मिल रहा है, जिससे कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की आशंका बनी हुई है।
मध्यप्रदेश में कब पहुंचेगा मानसून
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के अनुसार अगले 3–4 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के मध्यप्रदेश के और अधिक हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी तथा इसके बाद मानसून पूरे प्रदेश में तेजी से फैल सकता है।
किन इलाकों में पहले होगी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार सबसे पहले दक्षिण और पूर्वी मध्यप्रदेश के जिलों में अच्छी बारिश की संभावना है। इसके बाद भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, रीवा, सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग तक मानसूनी गतिविधियां धीरे-धीरे पहुंचेंगी।
किसानों के लिए क्या मायने
मानसून में देरी का सबसे अधिक असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ सकता है। सोयाबीन, धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलें समय पर वर्षा पर निर्भर करती हैं। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो बुआई सामान्य हो सकती है, लेकिन देरी बढ़ने पर कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका रहेगी।
क्या इस साल सामान्य से कम बारिश होगी
IMD के अद्यतन दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष देश में मानसूनी वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में भी औसत से कम वर्षा की आशंका व्यक्त की गई है। हालांकि जून के अंत और जुलाई की शुरुआत में मानसून के सक्रिय होने से कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।