छतरपुर। डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश के छतरपुर में दुर्लभ सफेद रंग के विशाल अजगर का रेस्क्यू किए जाने के बाद मामला चर्चा में है। अजगर के असामान्य रंग ने लोगों का ध्यान खींचा है। इसे अलबिनो अजगर बताया जा रहा है, लेकिन इसके अलबिनो होने की वैज्ञानिक पुष्टि और इसकी प्रजाति की आधिकारिक पहचान महत्वपूर्ण है।
छतरपुर की रेडियो कॉलोनी के बाहर 16 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे अजगर को रेस्क्यू किया गया। सर्पमित्र आकाश राठौर ने रेस्क्यू किया। हासिल जानकारी के मुताबिक अजगर के बर्मीज प्रजाति का होने और उसके पालतू होने की आशंका की जांच का भी उल्लेख है।
सफेद रंग के कारण चर्चा में आया अजगर
अजगर का रंग सामान्य तौर पर दिखाई देने वाले अजगरों से अलग होने के कारण इसे दुर्लभ बताया जा रहा है। सफेद या बेहद हल्के रंग के सांपों में अलबिनिज्म या ल्यूसिज्म जैसी स्थितियां हो सकती हैं। हालांकि, केवल रंग के आधार पर किसी सांप को अलबिनो घोषित नहीं किया जा सकता।
अलबिनिज्म एक आनुवंशिक स्थिति है, जिसमें मेलेनिन नामक रंगद्रव्य का निर्माण प्रभावित होता है। इसके कारण त्वचा और शरीर का रंग हल्का दिखाई दे सकता है। ल्यूसिज्म में भी शरीर का रंग सफेद या फीका हो सकता है, लेकिन यह अलबिनिज्म से अलग स्थिति है।
इसलिए अजगर की सही पहचान के लिए वन्यजीव विशेषज्ञों की जांच जरूरी है।
बर्मीज अजगर होने की आशंका, जांच पर नजर
इस अजगर को बर्मीज अजगर बताया गया है। यह प्रजाति अपने बड़े आकार के लिए जानी जाती है। इस मामले में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि अजगर प्राकृतिक रूप से वहां पहुंचा था या उसे किसी ने पालतू बनाकर रखा था। मीडिया रिपोर्ट में उसके पालतू होने की आशंका और मामले में केस दर्ज किए जाने का उल्लेख है। इस पहलू पर पुलिस और वन विभाग की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
वन्यजीवों को खुद पकड़ने से बचें
सांप या अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर उसे पकड़ने, छेड़ने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में वन विभाग या प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम को सूचना देना सुरक्षित विकल्प है।