नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क
दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित वैधानिक कर्तव्य उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड चांद कुरैशी के माध्यम से दाखिल की है।
याचिका में दावा किया गया है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने ऐसे फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को असंवैधानिक और शून्य घोषित करने की मांग की है। यह फिलहाल याचिकाकर्ता के आरोप और मांगें हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई फैसला नहीं दिया है।
मूल Form-6 बहाल करने की मांग
PIL में ECINet/ERONet पोर्टल पर Form-6 में कथित बदलावों को चुनौती दी गई है। याचिका में चुनाव नियमों के तहत निर्धारित मूल Form-6 को बहाल करने और पात्र नागरिकों को उसी वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर मतदाता के रूप में पंजीकरण की सुविधा देने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि Form-6 में पिछले SIR की मतदाता सूची में आवेदक या उसके रिश्तेदार की मौजूदगी से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांगी गई। याचिका में इस बदलाव को चुनौती देते हुए इसे वापस लेने की मांग की गई है।
13 करोड़ मतदाताओं के मामले में SIT जांच की मांग
याचिका में SIR के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने प्रस्तावित जांच में मतदाता डेटा से जुड़े ECINet और ERONet सिस्टम का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और डेटा में हुए बदलावों की जांच करने की मांग की है। यह आंकड़ा और इससे जुड़े आरोप याचिका में किए गए दावों का हिस्सा हैं, स्थापित न्यायिक तथ्य नहीं।
CEC समेत तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
PIL में CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और ECI के IT प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ Representation of the People Act, 1950 की धारा 32 के तहत शिकायत दर्ज कर कार्रवाई शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद हो तो संबंधित कानून के तहत बहुमत की राय के आधार पर फैसला होना चाहिए।
14 आपत्तियों वाली रिपोर्ट के बाद दाखिल हुई PIL
यह याचिका ऐसी रिपोर्टों के बाद दाखिल हुई है, जिनमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR समेत चुनावी मामलों से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में Form-6, मतदाता डेटा प्रबंधन और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
वहीं, ECI का पक्ष इससे अलग है। आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि SIR समेत उसके सभी आधिकारिक निर्णय और आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं और अलग-अलग राय संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं।
दिल्ली SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट की पिछली सुनवाई
दिल्ली SIR की मुख्य सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को चुनाव आयोग से ‘Logical Discrepancy’ श्रेणी में जारी नोटिसों के आधार और प्रक्रिया पर जवाब मांगा था। कोर्ट के सामने 33 लाख से अधिक मतदाताओं को जारी नोटिसों का मुद्दा था।