मैहर। डिजिटल डेस्क
मैहर वन मंडल की अमरपाटन रेंज स्थित गोरसरी पहाड़ी में जंगली हाथी ई-5 (सी-4) को पकड़ने के लिए बुधवार रात बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। बांधवगढ़ से पहुंचे 6 कुमकी हाथियों की मदद से वन विभाग की टीम ने हाथी को घेरने का प्रयास किया, लेकिन देर रात तक वह काबू में नहीं आ सका।
करीब 150 सदस्यीय वन अमला और पुलिस बल अभियान में जुटा रहा। मैहर वन मंडल के साथ अमरपाटन, मुकुंदपुर और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की टीमें भी ऑपरेशन में शामिल रहीं।
छह कुमकी हाथियों से की गई घेराबंदी
रेस्क्यू टीम ने गोरसरी पहाड़ी के आसपास रणनीतिक तरीके से घेराबंदी की। बांधवगढ़ से आए प्रशिक्षित कुमकी हाथियों को जंगली हाथी को नियंत्रित करने के लिए अभियान में उतारा गया।
वन विभाग की टीम लगातार हाथी की गतिविधियों पर नजर रखती रही। घेराबंदी के बावजूद हाथी लगातार अपना स्थान बदलता रहा और रेस्क्यू दल को चकमा देता रहा। देर रात तक अभियान जारी रहने के बावजूद उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने में सफलता नहीं मिली।
अभियान की निगरानी डीएफओ विद्या भूषण मिश्रा, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय, डिप्टी डायरेक्टर युहान कटारा, मैहर एसडीओ सिद्धार्थ दीपांकर और रेंजर प्रफुल्ल त्रिपाठी समेत अधिकारियों ने की।
गोरसरी-रामनगर-अमरपाटन मार्ग पर बैरिकेडिंग
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा को देखते हुए गोरसरी, रामनगर और अमरपाटन मार्ग पर बैरिकेडिंग की गई। ग्रामीणों और वाहन चालकों की आवाजाही पर भी निगरानी रखी गई।
वन विभाग का प्रयास था कि रेस्क्यू के दौरान हाथी अचानक आबादी या मुख्य सड़क की ओर न पहुंच सके। किसी अप्रत्याशित स्थिति में लोगों को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया।
बाणसागर का वाटर चैनल तैरकर पार किया था
वन विभाग के अनुसार ई-5 (सी-4) सितंबर के शुरुआती दिनों में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र से निकलकर मैहर वन मंडल की अमरपाटन रेंज में पहुंचा था। हाथी ने बाणसागर डैम के पास करीब 5 किलोमीटर लंबे वाटर चैनल को तैरकर पार किया था।
मैहर पहुंचने के बाद हाथी की मौजूदगी कई इलाकों में बनी रही। गोरसरी और आसपास के गांवों में वन विभाग की टीमें लगातार उसकी गतिविधियों की निगरानी करती रही हैं।
हाथी के हमले में ग्रामीण की मौत
हाथी के मैहर पहुंचने के बाद मौहारी गांव के ग्रामीण कंछेदी यादव की मौत हाथी के हमले में हुई थी। इसके बाद वन विभाग ने हाथी की निगरानी और उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने की प्रक्रिया तेज की।
उसकी गतिविधियों को देखते हुए प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों को अकेले खेत और जंगल की ओर नहीं जाने तथा हाथी के करीब नहीं पहुंचने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में मुनादी और सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई है।
रेस्क्यू के लिए लगातार चल रहा अभियान
ई-5 को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित कर वन क्षेत्र में भेजने के लिए वन विभाग की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं। इससे पहले भी कुमकी हाथियों की मदद से उसकी निगरानी और घेराबंदी की गई थी।
बुधवार रात का अभियान भी इसी रणनीति का हिस्सा था। हालांकि देर रात तक हाथी को पकड़ा नहीं जा सका। अब वन विभाग उसकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए आगे की रणनीति के अनुसार रेस्क्यू अभियान जारी रखेगा।