उमरिया। डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली में विराजमान मां बिरासिनी देवी का मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मां के इस दरबार से जुड़ा इतिहास, देवी की प्राचीन प्रतिमा और नवरात्र में हजारों ज्योति कलश स्थापित करने की परंपरा श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखती है। यहां चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान दूर-दराज से भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
स्वप्न में मिले संकेत से जुड़ी है मंदिर की स्थापना की मान्यता
स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पहले धौकल नामक व्यक्ति को स्वप्न में मां बिरासिनी के दर्शन हुए थे। मान्यता है कि देवी ने उन्हें बताया कि उनकी प्रतिमा एक खेत में है और उसे निकालकर नगर में स्थापित किया जाए।
इसके बाद धौकल प्रतिमा को लेकर आए और एक छोटे स्थान पर देवी की स्थापना की। आगे चलकर राजा बीरसिंह ने मंदिर का निर्माण कराया। इसी परंपरा से बिरसिंहपुर पाली में मां बिरासिनी के मंदिर की स्थापना की कथा जुड़ी हुई है।
कलचुरी काल की मानी जाती है मां की प्रतिमा
मंदिर में विराजमान मां बिरासिनी की प्रतिमा को कलचुरी काल का माना जाता है। मंदिर के इतिहास को लगभग एक हजार वर्ष पुराना बताया जाता है। प्रतिमा और मंदिर की प्राचीनता के कारण यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।
मां बिरासिनी को स्थानीय मान्यताओं में मां काली के स्वरूप से जोड़ा जाता है। जिला उमरिया के आधिकारिक विवरण में भी बिरसिंहपुर पाली स्थित मंदिर का उल्लेख है। यहां देवी के स्वरूप को लेकर प्रचलित मान्यताएं मंदिर को विशिष्ट पहचान देती हैं।
नवरात्र में हजारों ज्योति कलश स्थापित करने की परंपरा
मां बिरासिनी मंदिर में चैत्र और शारदीय, दोनों नवरात्र विशेष धार्मिक महत्व रखते हैं। इन अवसरों पर श्रद्धालु मां की पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामना के लिए ज्योति कलश, जवारा कलश तथा ज्योति-जवारा कलश स्थापित करवाते हैं।
मंदिर परिसर में ज्योति कलशों के लिए अलग स्थान बनाया गया है। नवरात्र के दौरान यहां घी और तेल के ज्योति कलशों की स्थापना की जाती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और संकल्प के अनुसार पूजा में भाग लेते हैं।
जवारा, पूजा और भंडारे से भक्तिमय रहता है मंदिर परिसर
नवरात्र के नौ दिनों में मंदिर में मां का विशेष शृंगार, भोग और पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए देवी के दरबार में पहुंचते हैं।
इस दौरान जवारा कलशों की स्थापना और विसर्जन की परंपरा भी निभाई जाती है। मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भंडारे और अन्य आयोजन होते हैं। नवरात्र के समय बिरसिंहपुर पाली में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है।
संगमरमर का मंदिर और धार्मिक परिसर
मंदिर का वर्तमान स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण है। परिसर में मुख्य मंदिर के साथ अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर, ज्योति कलश स्थल और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाएं हैं।
मां बिरासिनी का यह दरबार उमरिया जिले की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और नवरात्र की परंपराओं के कारण बिरसिंहपुर पाली का यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है।
कैसे पहुंचें मां बिरासिनी मंदिर
बिरसिंहपुर पाली उमरिया-शहडोल मार्ग पर स्थित है और उमरिया जिला मुख्यालय से लगभग 36 किलोमीटर दूर है। पाली में रेलवे स्टेशन भी है, जिसे पाली-बिरसिंहपुर स्टेशन के नाम से जाना जाता है। सड़क और रेल मार्ग से यहां पहुंचकर श्रद्धालु मां बिरासिनी के दर्शन कर सकते हैं।