सतना। डिजिटल डेस्क
मैहर के भदनपुर निवासी किशोरी और उसके नवजात की मौत के मामले में जांच के दौरान उम्र और वैवाहिक स्थिति से जुड़े अहम तथ्य सामने आए हैं। अमरपाटन बीएमओ डॉ. आरके सतनामी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर दीपांजलि नाबालिग थीं। रिपोर्ट से जुड़े विवरण में उनके अविवाहित होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में अब जांच का दायरा प्रसव के दौरान संभावित चिकित्सकीय लापरवाही के साथ नाबालिग गर्भवती के उपचार और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन तक पहुंच गया है।
जन्मतिथि और दर्ज उम्र में अंतर
जांच से जुड़े दस्तावेजों में किशोरी की उम्र एक जगह 20 वर्ष दर्ज होने की जानकारी सामने आई है, जबकि दूसरे दस्तावेज में उनकी जन्मतिथि 21 अक्टूबर 2008 लिखी गई है। जन्मतिथि सही होने पर 18 सितंबर 2026 को उनकी उम्र 18 वर्ष से कम थी।
सीएमएचओ को भेजे गए प्रतिवेदन में उम्र से जुड़े अंतर को दूर करने के लिए मूल दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी बताया गया है। उम्र की आधिकारिक पुष्टि से मामले की जांच के कई महत्वपूर्ण पहलू स्पष्ट हो सकते हैं।
मैहर से सतना रेफर
अमरपाटन बीएमओ की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 15 सितंबर को पेट में दर्द होने पर दीपांजलि को सिविल अस्पताल मैहर ले जाया गया था। वहां से उन्हें सतना जिला अस्पताल रेफर किया गया। दस्तावेजों में 17 सितंबर को जिला अस्पताल में भर्ती किए जाने और 18 सितंबर की रात प्रसव के दौरान नवजात की मौत का उल्लेख है।
इसके बाद किशोरी की हालत बिगड़ गई और उपचार के दौरान उनकी भी मौत हो गई। परिजनों ने उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। अब जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि प्रसव के दौरान कौन-कौन से चिकित्सकीय निर्णय लिए गए और मरीज की स्थिति बिगड़ने पर क्या कदम उठाए गए।
नाबालिग गर्भवती के मामले में प्रक्रिया पर सवाल
मामले में यह भी जांच का विषय है कि अस्पताल में भर्ती के समय किशोरी की उम्र और वैवाहिक स्थिति संबंधी जानकारी दर्ज की गई थी या नहीं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, नाबालिग गर्भवती होने की जानकारी पुलिस और जिला बाल कल्याण समिति को नहीं दी गई थी।
यदि इसकी पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी। रेफरल में लगे समय, उपचार के रिकॉर्ड और प्रसव के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की पड़ताल से यह पता चल सकेगा कि निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।
केसशीट और सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जांच समिति के पुनर्गठन और स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। इसके साथ ही अस्पताल की केसशीट, रेफरल रिकॉर्ड, भ्रूण की धड़कन से संबंधित रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग भी उठाई गई है।
इन रिकॉर्ड से उपचार की समय-सीमा, मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय निर्णयों से जुड़े तथ्यों का मिलान किया जा सकता है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि जच्चा और बच्चा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या उपचार या निर्धारित प्रक्रिया में कोई चूक हुई थी।
बाल कल्याण समिति ने उठाए सवाल
जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष चंद्रकिरण श्रीवास्तव ने कहा कि समिति को इस मामले में न तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से और न ही संबंधित थाने से जानकारी दी गई।
उन्होंने कहा, ‘अगर ऐसा है तो इस पर पॉक्सो एक्ट के साथ-साथ झूठी जानकारी देने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए।’
अब जांच में उम्र और वैवाहिक स्थिति से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन, अस्पताल के रिकॉर्ड की पड़ताल और संबंधित विभागों की भूमिका स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।