भोपाल। डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) की ऑनलाइन व्यवस्था में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक परीक्षण आवेदन में गधे की तस्वीर और फर्जी जानकारी के बावजूद नर्सिंग रजिस्ट्रेशन का प्रोविजनल प्रमाणपत्र जारी हो गया।
यह आवेदन NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने ऑनलाइन सिस्टम की जांच के लिए किया था। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य यह देखना था कि पोर्टल आवेदक की पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर करता है।
गधे की फोटो लगाई
आवेदन में नाम ‘Donkey MPNRC’ दर्ज किया गया था। फोटो के स्थान पर गधे की तस्वीर लगाई गई।
पिता के नाम में ‘Donkey Father’, मां के नाम में ‘Donkey Mother’ और जाति के कॉलम में ‘Animal’ दर्ज किया गया था। आवेदन में गलत पता और अन्य मनमानी जानकारियां भी भरी गई थीं।
5 मिनट में प्रमाणपत्र
रवि परमार के मुताबिक आवेदन के साथ ऐसे दस्तावेज अपलोड किए गए जो वास्तविक नर्सिंग योग्यता साबित नहीं करते थे। इसके बाद 2,050 रुपये शुल्क जमा किया गया।
दावा है कि 25 सितंबर को आवेदन और भुगतान के करीब पांच मिनट बाद डिजिटल प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी हो गया। इसमें आवेदक को Registered Nurse and Registered Midwife दर्ज किया गया था।
BSc नर्सिंग भी दर्ज
जारी प्रमाणपत्र में ‘Donkey MPNRC’ के नाम से भोपाल नर्सिंग कॉलेज से BSc Nursing की पढ़ाई पूरी करने की जानकारी दर्ज थी। प्रमाणपत्र में प्रशिक्षण अवधि और रजिस्ट्रेशन की वैधता भी दर्ज की गई थी।
हालांकि, यह प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन था। इसे स्थायी नर्सिंग लाइसेंस या वास्तविक नर्सिंग योग्यता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
काउंसिल ने रोका रजिस्ट्रेशन
मामला सामने आने के बाद MPNRC ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया है। काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. बीनू कुशवाहा ने कहा कि प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के सत्यापन के अधीन होता है और गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज मिलने पर रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।
काउंसिल के अनुसार ऑनलाइन प्रक्रिया में अतिरिक्त सुरक्षा जांच लागू की जा रही है। फर्जी जानकारी देकर आवेदन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की बात भी सामने आई है।
सत्यापन व्यवस्था पर सवाल
इस मामले ने ऑनलाइन नर्सिंग रजिस्ट्रेशन में आवेदक की पहचान, फोटो, शैक्षणिक योग्यता और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
काउंसिल का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन के बाद दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। सत्यापन में गड़बड़ी मिलने पर प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।