मूर्ति विसर्जन पर NGT-CPCB की गाइडलाइन में क्या है? जानिए जरूरी नियम

नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क

गणेश उत्सव और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान मूर्ति विसर्जन को लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका मकसद नदियों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों को मूर्तियों, रंगों और पूजा सामग्री से होने वाले प्रदूषण से बचाना है।

CPCB ने 12 मई 2020 को Revised Guidelines for Idol Immersion जारी की थी, जिसे 1 जनवरी 2021 से प्रभावी किया गया। इन दिशा-निर्देशों में मूर्ति बनाने की सामग्री से लेकर विसर्जन स्थल और बाद में अवशेषों के निपटारे तक की व्यवस्था बताई गई है।

POP की मूर्तियों पर रोक

CPCB की संशोधित गाइडलाइन में Plaster of Paris यानी POP से बनी मूर्तियों के इस्तेमाल पर रोक का प्रावधान है। इसके साथ प्लास्टिक और थर्मोकोल जैसी गैर-जैव-अवक्रमणीय सामग्री के इस्तेमाल से भी बचने को कहा गया है।

गाइडलाइन में प्राकृतिक मिट्टी और दूसरी पर्यावरण अनुकूल सामग्री से मूर्तियां बनाने को बढ़ावा दिया गया है। मूर्तियों पर जहरीले और गैर-जैव-अवक्रमणीय रासायनिक रंगों के बजाय प्राकृतिक तथा गैर-विषैले रंगों के इस्तेमाल की व्यवस्था है।

कृत्रिम विसर्जन कुंड को प्राथमिकता

CPCB ने जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए स्थानीय निकायों को कृत्रिम या अस्थायी विसर्जन कुंड और टैंक तैयार करने की व्यवस्था दी है।

इन स्थानों पर बैरिकेडिंग, पहुंच मार्ग और जरूरी सुरक्षा व्यवस्था रखने तथा विसर्जन स्थलों की जानकारी पहले से उपलब्ध कराने का प्रावधान है। स्थायी कृत्रिम विसर्जन टैंक बनाने को भी प्रोत्साहित किया गया है।

नदी-तालाब में विसर्जन को लेकर क्या व्यवस्था है

CPCB की गाइडलाइन का मुख्य जोर यह है कि मूर्ति विसर्जन से नदियों, तालाबों और झीलों की जल गुणवत्ता प्रभावित न हो। इसलिए निर्धारित कृत्रिम कुंड या सीमित विसर्जन क्षेत्र का इस्तेमाल करने की व्यवस्था की गई है।

हालांकि, इसे पूरे देश में हर नदी और तालाब में मूर्ति विसर्जन पर एक समान पूर्ण कानूनी प्रतिबंध के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। किसी विशेष जलस्रोत के लिए अदालत या स्थानीय प्रशासन के अलग निर्देश लागू हो सकते हैं।

पूजा सामग्री पानी में डालने पर भी रोक

NGT के यमुना से जुड़े मामले में पूजा सामग्री और अन्य वस्तुओं को नदी में डालने को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।

CPCB की रिपोर्ट में Manoj Mishra बनाम Union of India मामले के 2015 के NGT आदेशों का उल्लेख है। इसके अनुसार यमुना में मूर्ति, फूल, हवन सामग्री, खाद्यान्न, तेल और अन्य पूजा सामग्री डालने पर रोक लगाई गई थी, सिवाय निर्धारित स्थलों के। आदेश के उल्लंघन पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान भी दर्ज है।

फूल-माला और सजावट पहले अलग करनी होगी

विसर्जन से पहले फूल, पत्तियां, कपड़े और सजावटी सामग्री अलग करने की व्यवस्था है।

जैव-अवक्रमणीय सामग्री को कंपोस्टिंग के लिए भेजने तथा अन्य ठोस कचरे का संबंधित नियमों के तहत निपटारा करने पर जोर दिया गया है। विसर्जन स्थल पर पूजा सामग्री या अन्य कचरा फेंकने से बचने की व्यवस्था भी गाइडलाइन में शामिल है।

विसर्जन के बाद अवशेष हटाने की जिम्मेदारी

मूर्ति विसर्जन के बाद पानी में बचे अवशेषों और जमा सामग्री को हटाने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की है।

CPCB की संशोधित गाइडलाइन में निर्धारित विसर्जन क्षेत्र में अवशेषों और डीसिल्टिंग की प्रक्रिया 24 घंटे के भीतर पूरी करने का प्रावधान है।

पानी की गुणवत्ता की निगरानी

विसर्जन से पहले और बाद में जल गुणवत्ता की निगरानी का भी प्रावधान है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित संस्थाओं को जल गुणवत्ता की जांच करनी होती है।

इसमें pH, घुलित ऑक्सीजन, BOD, COD, टर्बिडिटी, TDS और कुछ धातुओं सहित निर्धारित मानकों की निगरानी शामिल है।

6 फीट वाली सीमा को लेकर भ्रम

मूर्ति विसर्जन से जुड़े नियमों में 6 फीट की सीमा को पूरे देश का सामान्य CPCB नियम समझना सही नहीं है।

CPCB की 2020 की संशोधित गाइडलाइन में देशभर के लिए 6 फीट की ऐसी सामान्य सीमा निर्धारित नहीं की गई है। किसी राज्य या क्षेत्र में अदालत अथवा स्थानीय प्रशासन की ओर से अलग व्यवस्था हो सकती है।

इसलिए किसी विशेष राज्य की अंतरिम व्यवस्था को पूरे देश का नियम मानकर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

NGT और CPCB की भूमिका अलग-अलग

मूर्ति विसर्जन के लिए CPCB ने पर्यावरणीय दिशा-निर्देश तैयार किए हैं, जबकि NGT ने अलग-अलग मामलों में जलस्रोतों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर आदेश जारी किए हैं।

CPCB की अपनी रिपोर्ट में यमुना से जुड़े NGT के आदेशों को भी मूर्ति विसर्जन और पूजा सामग्री के निपटारे के संदर्भ में दर्ज किया गया है।

इसका सीधा मतलब है कि मूर्ति विसर्जन के दौरान पर्यावरण अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल, निर्धारित विसर्जन स्थल का उपयोग, पूजा सामग्री को अलग रखना और जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना मुख्य नियमों का हिस्सा है।

प्रशासन और पूजा समितियों की जिम्मेदारी

CPCB की गाइडलाइन में स्थानीय निकायों, पूजा समितियों और प्रदूषण नियंत्रण संस्थाओं की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं।

स्थानीय निकायों को विसर्जन स्थल, कृत्रिम कुंड, सुरक्षा, सफाई और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था करनी होती है। वहीं पूजा समितियों से पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों और सजावटी सामग्री के इस्तेमाल तथा विसर्जन स्थल पर निर्धारित व्यवस्था का पालन करने की अपेक्षा की गई है।

मूर्ति विसर्जन के दौरान इन नियमों का उद्देश्य धार्मिक गतिविधि को रोकना नहीं, बल्कि जलस्रोतों और पर्यावरण पर उसके प्रभाव को कम करना है।

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