नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क
पितरों के स्मरण और श्राद्ध कर्म का पक्ष शनिवार, 26 सितंबर से शुरू हो गया है। आज भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध है। इसके बाद 27 सितंबर से प्रतिपदा के साथ मुख्य पितृपक्ष श्राद्ध शुरू होंगे और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा।
पितरों के निमित्त क्या करने की परंपरा
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में परिवार के दिवंगत पूर्वजों का स्मरण कर उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, अन्नदान और ब्राह्मण भोजन कराया जाता है। माना जाता है कि श्रद्धा से किए गए इन कर्मों के जरिए पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
जिस तिथि को किसी परिजन का निधन हुआ हो, पितृपक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध करने की परंपरा है। यदि मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं हो तो अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा बताई जाती है।
तर्पण और पिंडदान कैसे किया जाता है
परंपरा के अनुसार स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर संकल्प लेकर पितरों का स्मरण किया जाता है। इसके बाद जल से तर्पण और पिंड अर्पित किए जाते हैं। परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार विधि अलग हो सकती है।
श्राद्ध के बाद श्रद्धानुसार भोजन और अन्नदान करने की भी परंपरा है। कई परिवार इस दौरान जरूरतमंदों, गौसेवा या अन्य धार्मिक सेवा कार्यों में भी योगदान करते हैं।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या होगी। यह पितृपक्ष का अंतिम दिन है। धार्मिक परंपरा में इस दिन उन पितरों के लिए श्राद्ध करने की बात कही जाती है, जिनकी निर्धारित श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारण से उस तिथि पर नहीं हो पाया।
पितृपक्ष की पूरी श्राद्ध तिथि
| तारीख | श्राद्ध |
|---|---|
| 26 सितंबर | भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध |
| 27 सितंबर | प्रतिपदा श्राद्ध |
| 28 सितंबर | द्वितीया श्राद्ध |
| 29 सितंबर | तृतीया श्राद्ध, महाभरणी |
| 30 सितंबर | चतुर्थी श्राद्ध |
| 1 अक्टूबर | पंचमी श्राद्ध |
| 2 अक्टूबर | षष्ठी श्राद्ध |
| 3 अक्टूबर | सप्तमी श्राद्ध |
| 4 अक्टूबर | अष्टमी श्राद्ध |
| 5 अक्टूबर | नवमी श्राद्ध |
| 6 अक्टूबर | दशमी श्राद्ध |
| 7 अक्टूबर | एकादशी श्राद्ध |
| 8 अक्टूबर | द्वादशी श्राद्ध |
| 9 अक्टूबर | त्रयोदशी श्राद्ध |
| 10 अक्टूबर | चतुर्दशी श्राद्ध/सर्वपितृ अमावस्या |
पंचांगों में तिथि की गणना के कारण अलग-अलग स्थानों पर विवरण में मामूली अंतर दिखाई दे सकता है। 2026 के प्रमुख पंचांग स्रोतों में 29 सितंबर को तृतीया और महाभरणी तथा 30 सितंबर को चतुर्थी के बाद 1 अक्टूबर को पंचमी बताया गया है।