RAM MANDIR TRUST: चंपत के बाद कृष्ण मोहन के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी, क्या आसान होगी इस पूर्व IFS अधिकारी की राह

राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। उनकी जगह पूर्व भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया है। ट्रस्ट के अनुसार यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता मजबूत करने और मंदिर प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

क्यों चर्चा में आए कृष्ण मोहन

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद के बाद ट्रस्ट पर लगातार सवाल उठ रहे थे। इसी बीच हुई ट्रस्ट की बैठक में नेतृत्व परिवर्तन का फैसला लिया गया। कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि नई स्थायी व्यवस्था होने तक कृष्ण मोहन महासचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। साथ ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय समिति भी गठित की गई है। अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है।

कौन हैं कृष्ण मोहन

कृष्ण मोहन उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के रहने वाले हैं और भारतीय विदेश सेवा (IFS) के पूर्व अधिकारी हैं। विदेश सेवा में लंबे प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें संगठन संचालन, नीति निर्माण और संस्थागत प्रबंधन का व्यापक अनुभव हासिल है। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे विभिन्न सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहे। अब उन्हें देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक ट्रस्टों में से एक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव बनाया गया है।

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ट्रस्ट ने क्यों सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

राम मंदिर निर्माण का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। अब सबसे बड़ी चुनौती मंदिर के दैनिक संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा, दान प्रबंधन और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करना है। ऐसे समय में अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी को जिम्मेदारी देकर ट्रस्ट ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि संचालन व्यवस्था को और अधिक पेशेवर बनाया जाएगा।

चंपत राय की जगह लेना आसान नहीं

चंपत राय पिछले कई वर्षों से राम मंदिर आंदोलन और ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे हैं। भूमि पूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा और मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका रही। ऐसे में कृष्ण मोहन के सामने केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के भरोसे को बनाए रखने की चुनौती भी होगी।

क्या बोले कृष्ण मोहन

नियुक्ति के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि हालिया विवाद से सभी को पीड़ा हुई है। उनकी पहली प्राथमिकता प्रबंधन और संचालन की कमियों को दूर करना तथा ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना होगी।

आगे क्या होगा

ट्रस्ट अब नए CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इसके अलावा दान प्रबंधन व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता को लेकर भी कई फैसले लिए जाने की संभावना है। ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था पहले की तरह बनी हुई है और मंदिर में आने वालों की संख्या पर कोई असर नहीं पड़ा है।

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