भिंड। डिजिटल डेस्क
भिंड जिले में पत्नी की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पति को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। तृतीय अपर सत्र न्यायालय ने ग्राम पुलेह का पुरा में हुई हत्या के मामले में जबर सिंह पुत्र भारत सिंह दोहरे को बीएनएस की धारा 103(1) के तहत दोषी माना। अदालत ने उस पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
26 जून 2025 को हुई थी पत्नी की हत्या
अभियोजन के अनुसार, मामला 26 जून 2025 का है। घटना के बाद जबर सिंह ने कथित तौर पर अपने पिता भारत सिंह को पत्नी डोली की हत्या की जानकारी दी थी। इसके बाद भारत सिंह ऊमरी थाने पहुंचा और पुलिस को घटना की सूचना दी। उसने फोन के जरिए डोली के मायके पक्ष को भी घटना की जानकारी दी।
इसके बाद डोली के पिता ने थाने पहुंचकर जबर सिंह और उसके पिता भारत सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने अपराध क्रमांक 135/2025 दर्ज करते हुए बीएनएस की धारा 103(1) और 3(5) के तहत मामला कायम कर जांच शुरू की।
शादी के कुछ महीने बाद हुई थी हत्या
पुलिस की विवेचना में सामने आया कि डोली की शादी जबर सिंह से 10 फरवरी 2025 को हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने शादी का कार्ड जब्त किया। आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त कर उसकी जांच की गई।
अभियोजन के मुताबिक, मोबाइल फोन में 25 जून की रात का एक वीडियो मिला। अभियोजन ने अदालत में दावा किया कि वीडियो में आरोपी अपनी पत्नी का आपत्तिजनक वीडियो बनाने का प्रयास कर रहा था और डोली इसका विरोध कर रही थी। अभियोजन ने इस घटनाक्रम को हत्या की वजह के रूप में अदालत के सामने रखा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्भवती होने की पुष्टि
मामले की जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया। रिपोर्ट के अनुसार डोली चार माह की गर्भवती थी। डॉक्टरों ने उसकी मौत की प्रकृति को हत्यात्मक बताया।
पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद मामले में चालान अदालत में पेश किया।
15 गवाहों के बयान और दस्तावेज पेश किए
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल 15 गवाहों के बयान कराए गए। इसके अलावा विभिन्न दस्तावेज और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए गए।
न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद जबर सिंह को दोषी माना। इसके बाद तृतीय अपर सत्र न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक उत्तम सिंह राजपूत ने पैरवी की।