मुंबई। डिजिटल डेस्क
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता का असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई दिया। सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी में 1.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से भारत के आयात बिल और महंगाई को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
सेंसेक्स 1124 अंक गिरकर बंद
सोमवार, 28 सितंबर को बीएसई सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ।
वहीं एनएसई निफ्टी 50 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत टूटकर 22,780.25 पर पहुंच गया। निफ्टी का यह स्तर करीब छह महीने के निचले स्तर के आसपास रहा।
कच्चे तेल की कीमत 106 डॉलर के पार
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा तेल आपूर्ति में संभावित व्यवधान की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड में तेजी रही।
29 सितंबर को ब्रेंट क्रूड 106.77 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड करीब 93.94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
तेल की ऊंची कीमतों से भारत पर दबाव इसलिए बढ़ता है क्योंकि महंगा कच्चा तेल आयात बिल, व्यापार घाटे और महंगाई पर असर डाल सकता है।
बैंकिंग और दूसरे सेक्टरों में भी बिकवाली
सोमवार की गिरावट व्यापक रही। निफ्टी के सभी प्रमुख सेक्टरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।
निफ्टी बैंक करीब 1.99 प्रतिशत गिरा, जबकि PSU बैंक इंडेक्स में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव रहा।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
बाजार में गिरावट के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में बिकवाली जारी रखी। सोमवार को एफआईआई ने करीब ₹5,353 करोड़ की इक्विटी बेची, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹5,189 करोड़ की खरीदारी की।
बढ़ते तेल दाम, कमजोर रुपया, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और पश्चिम एशिया की स्थिति फिलहाल भारतीय बाजार के लिए प्रमुख कारक बने हुए हैं।
रुपये पर भी दबाव
तेल की कीमतों में तेजी का असर रुपये पर भी पड़ा। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 95.9825 पर बंद हुआ, जो एक सप्ताह से अधिक समय का कमजोर स्तर था।
बाजार की नजर अब पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और आगामी वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। इन कारकों से आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।