उज्जैन में शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने का काम जारी, 7-8 दिन लगेंगे

उज्जैन। डिजिटल डेस्क

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने की प्रक्रिया मंगलवार को भी जारी है। प्रशासन, मस्जिद कमेटी और शहर काजी के बीच बनी सहमति के बाद प्रभावित हिस्से को हटाने का काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

मस्जिद का पूरा ढांचा नहीं हटाया जा रहा है। कार्रवाई केवल उस हिस्से तक सीमित है, जिसे प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण की सीमा में बाधक माना गया है। प्रक्रिया को पूरा होने में करीब सात से आठ दिन लगने की बात मस्जिद कमेटी से जुड़े प्रतिनिधि ने कही है।

प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच बनी सहमति

मस्जिद कमेटी से जुड़े प्रतिनिधि फहीम सिकंदर के अनुसार, स्थानीय प्रशासन, शहर काजी और कमेटी के पदाधिकारियों के बीच बातचीत के बाद प्रभावित हिस्सा स्वयं हटाने पर सहमति बनी।

उनके मुताबिक मुस्लिम समाज सिंहस्थ 2028 को लेकर चल रहे सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्य में सहयोग कर रहा है। शुरुआत में भारी मशीनें नहीं लगाई गईं और प्रभावित दीवार का हिस्सा लोगों ने खुद हटाना शुरू किया। जरूरत पड़ने पर आगे मशीनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कितना हिस्सा हटेगा, इस पर अभी पूरी स्पष्टता नहीं

मस्जिद के कितने हिस्से को हटाया जाएगा, इसको लेकर सार्वजनिक बयानों में अलग-अलग जानकारी सामने आई है। कमेटी से जुड़े प्रतिनिधि ने तीन से आठ फीट तक के हिस्से को हटाए जाने की संभावना बताई है।

वहीं मस्जिद पक्ष के वकील कुलदीप पाठक के अनुसार बातचीत के बाद करीब तीन फीट हिस्सा हटाने पर सहमति बनी है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 28 सितंबर के आदेश में समझौते को दर्ज किया गया है, लेकिन आदेश में हटाए जाने वाले हिस्से की सटीक लंबाई दर्ज नहीं है। इसलिए अंतिम माप को लेकर प्रशासनिक स्तर की स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना

मामला उज्जैन विकास योजना 2035 के तहत सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है। हाई कोर्ट के 9 सितंबर के आदेश में नगर निगम की ओर से बताया गया था कि कांठल चौराहा से गोपाल मंदिर तक सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है।

नगर निगम ने अदालत में कहा था कि यह मार्ग महाकाल मंदिर, गोपाल मंदिर और क्षिप्रा नदी की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है तथा सिंहस्थ और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है।

हाई कोर्ट ने समझौते के बाद दोनों अपीलों का निपटारा किया

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने 28 सितंबर को शाही मस्जिद से जुड़े दो रिट अपीलों का निपटारा किया। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मस्जिद के अधिकृत प्रशासनिक पक्ष और उज्जैन नगर निगम के बीच समझौता हो गया है।

अदालत ने नगर निगम के जवाब और संबंधित नोटिस में दिए गए आश्वासनों को निगम पर बाध्यकारी माना। कोर्ट रिकॉर्ड में समझौते का उल्लेख है, लेकिन समझौते की पूरी शर्तें आदेश में विस्तार से दर्ज नहीं हैं।

9 सितंबर के आदेश में क्या कहा गया था

9 सितंबर के एकल पीठ के आदेश में सड़क चौड़ीकरण से संबंधित नगर निगम की कार्रवाई और मस्जिद के प्रभावित हिस्से का मामला दर्ज है। नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया था कि शहर में सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 80 धार्मिक संरचनाओं को हटाया या स्थानांतरित किया जा रहा है।

इसी रिकॉर्ड में नगर निगम ने कहा था कि संबंधित सड़क पर 11 धार्मिक संरचनाएं—10 मंदिर और एक मस्जिद—पहले ही हटाई जा चुकी थीं और शाही मस्जिद के कुल निर्माण क्षेत्र के 10 प्रतिशत से कम हिस्से को प्रभावित करने का प्रस्ताव था।

सोमवार को पथराव के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा

28 सितंबर को प्रभावित हिस्सा हटाने की कार्रवाई के दौरान इलाके में विरोध और पथराव की स्थिति बनी थी। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और बल प्रयोग किया।

पुलिस के मुताबिक घटना के बाद कई मामले दर्ज किए गए और लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित भ्रामक और एआई-निर्मित वीडियो की भी जांच कर रही है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार ऐसे वीडियो में पूरी मस्जिद गिराए जाने का गलत दृश्य दिखाया गया था, जबकि वास्तविक कार्रवाई केवल प्रभावित हिस्से तक सीमित थी।

कलेक्टर बोले- स्थिति नियंत्रण में

मंगलवार सुबह शाही मस्जिद के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई। पुलिस की गश्त के साथ इलाके की निगरानी की जा रही है।

कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने स्थिति को शांत और नियंत्रण में बताया तथा लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। प्रशासन का जोर सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया को सहमति के आधार पर आगे बढ़ाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है।

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