भोपाल। डिजिटल डेस्क
मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर माध्यमिक शिक्षा मंडल ने नए आदेश जारी किए हैं। इसके तहत केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) उत्तीर्ण कर चुके शिक्षकों को वर्तमान TET में शामिल होने की जरूरत नहीं होगी। वहीं अशासकीय स्कूलों में प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षक भी पात्रता परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
CTET पास शिक्षकों को परीक्षा से छूट
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में सेवारत शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता की गई है। पहले यह परीक्षा कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से आयोजित की जानी थी, लेकिन अब माध्यमिक शिक्षा मंडल इसे ऑफलाइन प्रणाली से आयोजित करेगा।
आदेश के अनुसार जिन शिक्षकों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, उन्हें इस परीक्षा में शामिल होना आवश्यक होगा।
हालांकि, केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) उत्तीर्ण कर चुके शिक्षकों को इस परीक्षा में शामिल होने की आवश्यकता नहीं होगी।
इन शिक्षकों को परीक्षा में होना होगा शामिल
परीक्षा में जिले के शासकीय विद्यालयों में कार्यरत प्राथमिक स्तर के सहायक शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक, सहायक अध्यापक, संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-3 और प्राथमिक विज्ञान प्रयोगशाला शिक्षक शामिल होंगे।
इसी तरह माध्यमिक स्तर के उच्च श्रेणी शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक, अध्यापक और संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-2 के वे शिक्षक, जिन्होंने निर्धारित पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, उन्हें भी परीक्षा देनी होगी।
निजी स्कूलों के शिक्षक भी कर सकेंगे आवेदन
नए आदेश में अशासकीय विद्यालयों के प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी पात्रता परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई है।
परीक्षा के आवेदन पूर्ववत कर्मचारी चयन मंडल के पोर्टल के माध्यम से ही भरे जाएंगे। आवेदन की अंतिम तिथि 5 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
जिस जिले में नौकरी, वहीं परीक्षा केंद्र
शिक्षक जिस जिले में कार्यरत हैं, उन्हें उसी जिला मुख्यालय पर परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाएगा।
हालांकि किसी जिले में परीक्षार्थियों की संख्या बहुत कम होने पर माध्यमिक शिक्षा मंडल को समीपवर्ती जिले या संभागीय स्तर पर परीक्षा केंद्र आवंटित करने का अधिकार रहेगा।
परीक्षा को लेकर शिक्षकों में अब भी नाराजगी
पात्रता परीक्षा को लेकर शिक्षकों में अभी भी नाराजगी बनी हुई है। कई शिक्षक आवेदन नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब परीक्षा में शामिल होने के लिए छह मौके दिए गए हैं तो अभी से जल्दबाजी क्यों की जा रही है।
शिक्षक बोले- परीक्षा शब्द हटाकर ट्रेनिंग कराई जाए
शिक्षकों का एक वर्ग चाहता है कि प्रक्रिया से ‘परीक्षा’ शब्द हटाकर इसे प्रशिक्षण का रूप दिया जाए, ताकि शिक्षकों की गरिमा बनी रहे।
शिक्षकों का कहना है कि यदि शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा जरूरी की जा रही है तो अन्य विभागों में भी इसी तरह की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका तर्क है कि तकनीक और कार्यप्रणाली बदलने के बावजूद कई विभागों में काम का स्वरूप जारी रहता है।