त्रेतायुगीन गुप्त गोदावरी की गुफा में गिरे पत्थर, श्रद्धालुओं की एंट्री बंद

सतना। डिजिटल डेस्क

चित्रकूट स्थित प्रमुख तीर्थस्थल गुप्त गोदावरी में लगातार बारिश के बाद चट्टानों से पत्थर गिरने और दरार दिखाई देने की घटना सामने आई है। पहली गुफा में शंकर भगवान के मंदिर के पास चट्टान से तीन बड़े पत्थर टूटकर नीचे गिर गए। इसके बाद प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए गुफा में प्रवेश पर रोक लगा दी है। रिपोर्टों के अनुसार खटखटा चोर स्थान से नीचे उतरने वाली सीढ़ियों के पास भी करीब 30 से 40 किलो वजन के दो पत्थर गिरने की जानकारी सामने आई है। वहीं रामदरबार के नीचे चट्टान में दरार और ज्वाइंट दिखाई देने की बात सामने आई है। पौराणिक मान्यता है कि वनवास काल के दौरान भगवान राम और लक्ष्मण कुछ समय के लिए गुप्त गोदावरी की इन गुफाओं में रहे थे।

शाम को गुफा पहुंचा प्रशासनिक अमला

घटना की सूचना मिलने के बाद मझगवां एसडीएम महिपाल गुर्जर और नगर परिषद के सीएमओ अंकित सोनी समेत प्रशासनिक अमला शाम करीब 7 बजे गुप्त गोदावरी पहुंचा।

अधिकारियों ने पहली गुफा के भीतर जाकर उन स्थानों का निरीक्षण किया, जहां चट्टानों से पत्थर टूटकर नीचे गिरे थे। रामदरबार के नीचे दिखाई दे रही दरार और अन्य संवेदनशील स्थानों की स्थिति भी देखी गई।

लगातार बारिश के कारण गुफा में पानी का रिसाव बढ़ने की बात सामने आई है। ऐसे में प्रशासन ने एहतियात के तौर पर श्रद्धालुओं की आवाजाही रोकने का निर्णय लिया है।

पुरातत्व और वैज्ञानिक विशेषज्ञ करेंगे जांच

गुफा दोबारा खोलने से पहले चट्टानों की मजबूती और पत्थर गिरने के कारणों की जांच कराई जाएगी। प्रशासन की ओर से पुरातत्व विभाग और विशेषज्ञों से निरीक्षण कराने की तैयारी है।

विशेषज्ञ यह देखेंगे कि चट्टानों में दिखाई दे रही दरार कितनी गंभीर है, बारिश और पानी के रिसाव का संरचना पर कितना असर पड़ा है और आगे पत्थर गिरने की आशंका कितनी है।

अभी पत्थर गिरने के कारण को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। हालिया प्रशासनिक निरीक्षण में भी विशेषज्ञ जांच के बाद ही वास्तविक संरचनात्मक स्थिति स्पष्ट होने की बात कही गई है।

बारिश में पहले भी बंद रही थी गुफा

इस वर्ष भारी बारिश के दौरान गुप्त गोदावरी में श्रद्धालुओं की आवाजाही पहले भी प्रभावित हुई थी। 19 अगस्त से 5 सितंबर तक गुफा बंद रही थी।

30 अगस्त तथा 1, 2 और 3 सितंबर को गुफा के अंदर पानी भरने की स्थिति बनी थी। पहाड़ी और जंगल क्षेत्र से बारिश का पानी लगातार गुफा की चट्टानों के भीतर रिसता रहा।

गुप्त गोदावरी प्राकृतिक गुफा प्रणाली है और जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यहां गुफा के भीतर जलधारा बहती है।

चार साल से सफाई नहीं होने का दावा

गुफा में काम करने वाले कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले करीब चार वर्षों से गुफा की पूरी तरह सफाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि कई स्थानों पर मिट्टी और बालू जमा होने से पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है।

हालांकि इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल स्थानीय कर्मचारियों और लोगों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

रेलवे नहीं, गुफा की सुरक्षा पर भी अब फोकस

गुप्त गोदावरी चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह चित्रकूट से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित प्राकृतिक गुफा प्रणाली है।

प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में चट्टानों से पत्थर गिरने और दरार दिखाई देने के बाद सुरक्षा जांच पूरी होने तक प्रवेश रोकने का निर्णय महत्वपूर्ण है।

अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही तय होगा कि गुफा को श्रद्धालुओं के लिए कब खोला जाए।

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