इटारसी। डिजिटल डेस्क
इटारसी के पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, आयुध निर्माणी में सीबीआई एसीबी भोपाल ने रिश्वत के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने विद्यालय की प्राचार्य श्रद्धा पाठक और किरत सिंह सराठे को 3 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है।
सीबीआई की कार्रवाई के बाद केंद्रीय विद्यालय और शिक्षा विभाग से जुड़े क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मामला एक फर्म के लंबित बिलों के भुगतान से जुड़ा बताया जा रहा है।
करीब 8 लाख रुपये के बिलों के भुगतान का मामला
सीबीआई के मुताबिक, भोपाल की एक फर्म ने केंद्रीय विद्यालय से जुड़े कार्य किए थे। इन कार्यों के भुगतान के लिए करीब 8 लाख रुपये के बिल लंबित थे।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि इन बिलों का भुगतान कराने के एवज में 3 लाख रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।
बताया गया कि फर्म को सितंबर में GeM पोर्टल के माध्यम से पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2, सीपीई इटारसी में तीन कमरों के नवीनीकरण का काम मिला था। करीब 90 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद भुगतान से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ी।
शिकायत के बाद CBI ने किया सत्यापन
रिश्वत की मांग से परेशान शिकायतकर्ता ने 5 अक्टूबर को सीबीआई एसीबी भोपाल में शिकायत की। इसके बाद सीबीआई ने शिकायत की प्रारंभिक जांच और सत्यापन की कार्रवाई की।
सीबीआई के अनुसार, 6 अक्टूबर को स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में शिकायत में लगाए गए आरोपों का सत्यापन किया गया। इस दौरान रिश्वत की मांग की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई।
3 लाख रुपये लेते पकड़ा
सीबीआई ने जाल बिछाकर कार्रवाई की। जांच एजेंसी के अनुसार, 7 अक्टूबर को प्राचार्य श्रद्धा पाठक और किरत सिंह सराठे को 3 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
इटारसी और आगरा में तलाशी
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आरोपियों से जुड़े परिसरों की तलाशी भी ली। जांच एजेंसी की टीम ने इटारसी और आगरा में आवासीय एवं कार्यालय परिसरों की तलाशी ली।
तलाशी के दौरान संपत्ति और मामले से जुड़े दस्तावेज बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। सीबीआई मामले में आगे की जांच कर रही है।
केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य हैं श्रद्धा पाठक
श्रद्धा पाठक पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, आयुध निर्माणी इटारसी की प्राचार्य हैं। उपलब्ध विद्यालयीय रिकॉर्ड में उनका नाम प्राचार्य के रूप में दर्ज है।
सीबीआई की कार्रवाई के बाद अब मामले में रिश्वत की मांग, भुगतान प्रक्रिया और कथित बिचौलिये की भूमिका को लेकर जांच आगे बढ़ेगी।