MP में मोबाइल टावर लगाने के नियम होंगे सख्त, NGT ने SOP बनाने के दिए निर्देश

भोपाल। डिजिटल डेस्क

मध्य प्रदेश में मोबाइल टावरों की स्थापना को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने राज्य सरकार और स्थानीय निकायों को स्पष्ट नियम और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। NGT की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने टावरों की साइटिंग, भूमि उपयोग, भवन निर्माण और रेडिएशन मॉनिटरिंग को लेकर कई निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश 22 सितंबर 2026 को Madhya Chetriya Samajik Aur Kanooni Welfare Society vs Asnani Builders मामले में दिया गया।

स्कूल, अस्पताल और आबादी वाले क्षेत्रों के लिए तय होंगे नियम

NGT ने मध्य प्रदेश के शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव और भोपाल नगर निगम को स्थानीय भूमि उपयोग नियमों और साइटिंग मानकों को ध्यान में रखते हुए SOP तैयार करने को कहा है।

इसमें स्कूल, अस्पताल, खेल मैदान, जेल और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास मोबाइल टावर लगाने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर नियम तय करने के निर्देश दिए गए हैं। टावर लगाने की अनुमति देते समय भूमि उपयोग और भवन निर्माण से जुड़े स्थानीय नियमों को भी ध्यान में रखना होगा।

टावर लगाने से पहले DoT के नियमों का पालन जरूरी

ट्रिब्यूनल ने कहा कि मोबाइल टावरों की स्थापना के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) की ओर से जारी क्लीयरेंस संबंधी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

NGT ने यह भी कहा कि टावरों की स्थापना से जुड़े नियमों में साइटिंग और पर्यावरणीय मानकों को शामिल किया जाना चाहिए। दूरसंचार विभाग को लाइसेंस जारी करते समय इन शर्तों को शामिल करने और समय-समय पर अनुपालन की निगरानी करने को कहा गया है।

रेडिएशन की नियमित जांच होगी

NGT ने दूरसंचार विभाग की Telecom Enforcement Resource and Monitoring (TERM) Cell को मोबाइल टावरों से होने वाले रेडिएशन की नियमित जांच करने का निर्देश दिया है।

यदि किसी टावर से निकलने वाला रेडिएशन निर्धारित मानकों से अधिक पाया जाता है तो नियमों के अनुसार तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करनी होगी।

टेलीकॉम कंपनियों को देना होगा सेल्फ-सर्टिफिकेट

आदेश के अनुसार टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर को रेडिएशन टेस्टिंग शुरू होने के 15 दिनों के भीतर यह प्रमाणित करने वाला सेल्फ-सर्टिफिकेट देना होगा कि टावर से निकलने वाला रेडिएशन DoT द्वारा निर्धारित मानकों के भीतर है।

टावर का संचालन इस प्रमाण-पत्र को देने के बाद ही शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

टावर के DG सेट के लिए भी नियम

NGT ने मोबाइल टावरों को बिजली उपलब्ध कराने वाले डीजल जनरेटर (DG) सेट को लेकर भी निर्देश दिए हैं। DG सेट लगाने के लिए संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या प्रदूषण नियंत्रण समिति से आवश्यक सहमति लेनी होगी।

साथ ही DG सेट से होने वाले वायु प्रदूषण और ध्वनि उत्सर्जन के निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा।

NGT ने रेडिएशन को लेकर क्या कहा

इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि NGT ने मौजूदा वैज्ञानिक सामग्री पर विचार करने के बाद कहा कि आज उपलब्ध वैज्ञानिक सामग्री से टेलीकॉम नेटवर्क से निकलने वाले गैर-आयनीकरण रेडिएशन से किसी स्पष्ट नुकसान या जोखिम का संकेत नहीं मिलता।

इसलिए आदेश को मोबाइल टावरों से स्वास्थ्य नुकसान की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने इसके बजाय मौजूदा DoT मानकों के पालन, नियमित मॉनिटरिंग और स्थानीय स्तर पर टावरों की साइटिंग के लिए स्पष्ट नियम बनाने पर जोर दिया है।

मामला भोपाल के मोबाइल टावर से जुड़ा था

यह मामला भोपाल के अरविंद विहार, बागमुगलिया क्षेत्र में लगाए गए एक मोबाइल/टेलीकॉम टावर से संबंधित था। याचिकाकर्ता ने टावर के आसपास स्कूलों और अस्पतालों की मौजूदगी तथा रेडिएशन को लेकर चिंता जताई थी।

NGT ने EMR से जुड़े दावों पर अपनी अधिकारिता के संबंध में भी चर्चा की, लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान टावरों की स्थापना, स्थानीय भूमि उपयोग और रेडिएशन मॉनिटरिंग को लेकर संबंधित विभागों को ऊपर बताए गए निर्देश जारी किए।

अब क्या बदलेगा?

NGT के निर्देश के बाद मध्य प्रदेश सरकार और स्थानीय निकायों को मोबाइल टावरों की स्थापना के लिए स्थानीय भूमि उपयोग, भवन निर्माण और संवेदनशील स्थानों के आसपास साइटिंग से जुड़े नियमों को व्यवस्थित करने की दिशा में काम करना होगा।

इसका उद्देश्य टावर लगाने की प्रक्रिया में स्थानीय नियमों, DoT के रेडिएशन मानकों और पर्यावरणीय अनुपालन को एक साथ लागू करना है।

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